50 couples got happiness of having a child through IVF in a year In Moradabad

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : new born

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आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) या पराए स्पर्म से अपनी संतान के सुख में अब झिझक का पर्दा हट चुका है। संकोच और रुढि़यों की बेड़ियां तोड़कर निसंतान दंपती अब तेजी से इस रास्ते पर बढ़ रहे हैं। मुरादाबाद में ही एक वर्ष में करीब 50 ऐसे दंपती हैं, जिन्होंने दान के शुक्राणुओं से माता-पिता बनने का सुख हासिल किया है। 

दिल्ली, नोएडा और अन्य बड़े शहरों में जाकर ऐसा करने वालों को भी जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा दोगुना होना तय है। वक्त का बदलाव और जरूरत देखकर स्पर्म डोनर भी स्थानीय स्तर पर तेजी से बढ़े हैं। चिकित्सा विज्ञान की इस उपलब्धि ने सूने आंगन में किलकारी की गूंज बढ़ाने के साथ निसंतान महिलाओं को वक्त-वक्त पर मिलने वाले तानों से भी आजादी दिलाई है।

मिट गया बांझ का कलंक

दीनदयाल नगर निवासी महिला सरकारी विद्यालय में शिक्षिका हैं। पति अधिवक्ता हैं। शादी के दस वर्ष बाद भी वह मां नहीं बन सकीं तो किसी ने उनके मोटापे को दोषी ठहराया तो कोई बांझ होने का ताना देता था। हालात से टूटकर पढ़े-लिखे होते हुए भी टोने-टोटके का सहारा भी लिया। 

सहेली की सलाह पर महिला ने पति के साथ जांच कराई तो पति के स्पर्म कमजोर मिले। परिवार को सच स्वीकारने और फैसले में डेढ़ साल का वक्त लगा। इसके बाद आईवीएफ का रास्ता अपनाया। अब एक बेटा-बेटी के साथ पूरा परिवार खुश है।

 



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