fake will was prepared to take over the land of former minister Raghuvar Dayal in Agra

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– फोटो : फाइल फोटो

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आगरा में कई बार विधायक और पूर्व कैबिनेट मंत्री रहे दिवंगत रघुवर दयाल वर्मा की फर्जी वसीयत तैयार करके पुश्तैनी जमीन पर कब्जे की साजिश की गई। तहसील प्रशासन ने पूरे मामले की जांच में फर्जीवाड़ा पाया। इसके बाद थाना शाहगंज में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है।

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आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर-3 निवासी राकेश वर्मा, पूर्व मंत्री रघुवर दयाल वर्मा की बहन के नाती हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके बाबा की मृत्यु 11 जून 2011 को हुई थी। उनकी मृत्यु से 5 वर्ष पहले पत्नी छोटी देवी की मृत्यु हो चुकी थी। उनके कोई संतान नहीं थी। दो बहनें धनवंती और भूदेवी की भी मृत्यु हो चुकी है।

रघुवर दयाल वर्मा की मृत्यु के बाद उनकी ताजगंज के नगला पैमा स्थित 28 बीघा पुश्तैनी जमीन के वारिस उनकी बहन के बेटे छविराम वर्मा, सोरन सिंह, राम सनेही और नाती रविंद्र कुमार और नरेंद्र कुमार थे। तहसील के दस्तावेज में उनका नाम अंकित हो चुका था।

राकेश का आरोप है कि अगस्त 2011 में गांव के ही शिवराम, विजेंद्र और तूफान सिंह ने खुद को मंत्री का भतीजा बताते हुए बाबा रघुवर दयाल की फर्जी वसीयत दिखाकर वारिस घोषित करने का शपथपत्र दिया। जांच में शपथपत्र खारिज हो गया।

इसके बाद आरोपी शिवराम ने अपने और अपने पुत्रों तत्कालीन विधायक शिकोहाबाद ओमप्रकाश वर्मा, निहाल सिंह और मोहन वर्मा के साथ अपने समधी विशंभर और अन्य मृत व्यक्तियों को गवाह बनाते हुए वसीयत को दस्तावेज में शामिल करा दिया। इस वसीयत को आठ जुलाई 1981 का दर्शाकर बाबा रघुवर दयाल और तत्कालीन तहसील उपनिबंधक तेज बहादुर के फर्जी हस्ताक्षर कर दिए।

पीड़ित वारिसों ने विधानसभा में शपथ के दौरान किए बाबा के हस्ताक्षर और तत्कालीन उपनिबंधक के हस्ताक्षर की प्रति निकलवाई। जांच में दोनों हस्ताक्षर फर्जी पाए गए। तहसील में संबंधित वाद में उनके पक्ष में फैसला सुनाया गया। वादी राजेश वर्मा ने बताया कि जांच के बाद डीसीपी सिटी सूरज राय के आदेश पर केस दर्ज हुआ है।

 



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