बरेली के बहेड़ी में सहकारी गन्ना विकास समिति की वार्षिक बैठक में बृहस्पतिवार को किसानों का प्रतिनिधित्व कर रहे बोर्ड ने केसर चीनी मिल को गन्ना सप्लाई न किए जाने का एलान कर दिया। दूसरी चीनी मिलों को गन्ना खरीद केंद्र आवंटित करने को हरी झंडी दी गई। बरेली के सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार ने भी चीनी मिल प्रबंधन पर किसानों के साथ धोखा करने का आरोप लगाते हुए किसानों से गन्ना न देने की अपील की। चीनी मिल की ओर से पक्ष रखने के लिए मिलकर गन्ना प्रबंधक मंच पर चढ़े, जिनकी किसानों ने कोई बात नहीं सुनी और उनका बहिष्कार कर दिया। 

चीनी मिल पर किसानों का 166 करोड़ रुपये बकाया

केसर चीनी मिल पर बहेड़ी क्षेत्र के गन्ना किसानों का 166 करोड़ रुपये बकाया है। जिसको लेकर किसान लगातार आंदोलन भी कर रहे हैं। सहकारी गन्ना विकास समिति की वार्षिक साधारण सभा की बैठक में गन्ना समिति बोर्ड के अध्यक्ष, डायरेक्टर, डेलीगेट सदस्यों ने बकाया गन्ना मूल्य भुगतान दिलाने की मांग सचिव से की। इसके बाद चीनी मिल को खरीद केंद्र आवंटन को लेकर चर्चा हुई, जिसमें सभी ने एक स्वर में कहा कि मीरगंज, पीलीभीत, सितारगंज, फरीदपुर तथा बहादुरपुर की चीनी मिलों को गन्ना खरीद केंद्र आवंटित कर दिए जाएं। केसर चीनी मिल को जो गेट पर गन्ना मिलता है उसके लिए आसपास के क्षेत्र में अलग-अलग चीनी मिलों के 25 खरीद केंद्र लगाए जाएं, जिसमें वह गन्ना सप्लाई हो। 

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डेलीगेट सरदार सतनाम सिंह ने गन्ना समिति के सचिव पर छह साल से यहीं जमे रहने का आरोप लगाया। सरदार तरसेम सिंह ने गन्ना विभाग के अधिकारियों पर किसानों का शोषण कराने का आरोप लगाया। पूर्व अध्यक्ष केंद्र पाल सिंह ने कहा कि एजेंडा में जो एक से लेकर सात तक बिंदु है उनको लेकर दोबारा बैठक हो। गन्ना विभाग ने तीन दिन पहले एजेंडा तथा बैठक का निमंत्रण दिया जबकि यह 15 दिन पहले दिया जाना चाहिए था। कोरोजन दवाई के वितरण में किसानों का शोषण किए जाने का आरोप लगाया।



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