झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार और डॉ. मनमोहन डोबरियाल ने किसानों को सलाह दी कि वे अपनी कृषि भूमि, मेड़ या बंजर भूमि पर पौधरोपण कर कार्बन क्रेडिट से अतिरिक्त आय अर्जित करें।
उन्होंने बताया कि अब किसान पौधे लगाकर कार्बन क्रेडिट बेचकर भी अतिरिक्त आमदनी कर सकते हैं। प्रदेश सरकार की ‘कार्बन क्रेडिट फाइनेंस योजना’ का दूसरा चरण शीघ्र ही झांसी मंडल में प्रारंभ होने जा रहा है। इसके अंतर्गत किसान अपने खेतों में आम, बेल, जामुन, अमरूद, संतरा, नींबू आदि फलदार प्रजातियों का रोपण कर सकते हैं। ये वृक्ष वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर कार्बन क्रेडिट अर्जित करने में सहायक हैं। किसान सागौन, शीशम, पीपल, नीम आदि पौधे भी लगा सकते हैं। ये वृक्ष लंबे समय तक कार्बन अवशोषित करते हैं और अधिक कार्बन क्रेडिट अर्जित करने में सहायक हैं। एक मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषण पर एक कार्बन क्रेडिट प्राप्त होता है। किसान पौधरोपण के लगभग तीन वर्ष बाद कार्बन क्रेडिट का लाभ ले सकते हैं। इसके लिए उन्हें पौधरोपण की तिथि, प्रजाति का नाम, वृक्षों की उम्र, तने की मोटाई जैसी जानकारी रखनी होगी, ताकि जब वन विभाग और ऊर्जा एवं संसाधन संस्थान (टीइआरआई) की टीम सत्यापन के लिए आए तो सभी आंकड़े उनके पास उपलब्ध हों।
