शहर के पांचाल घाट स्थित गंगा तट पर लगा ऐतिहासिक मेला रामनगरिया अब अंतरराष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ रहा है। मेला रामनगरिया की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को दुनिया के सामने लाने के लिए जर्मनी और फ्रांस से पत्रकार यहां पहुंचे हैं। मेला रामनगरिया की डाक्यूमेंट्री बनाने के उद्देश्य से जर्मनी के हेलमिट हैसी और फ्रांस के पियर्स ने मेला रामनगरिया में संत समिति जूना अखाड़ा के अध्यक्ष सत्यगिरी महाराज से भेंट कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने मेला की परंपराओं, साधु-संतों के जीवन और गंगा तट की आध्यात्मिक गतिविधियों की जानकारी ली।
हेलमिट हैसी ने बताया कि मेला रामनगरिया पर बनने वाली डाक्यूमेंट्री विदेशों में दिखाई जाएगी। इससे भारत की प्राचीन आध्यात्मिक संस्कृति और ग्रामीण अंचल से जुड़े इस मेले की विशिष्ट पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच सकेगी। विदेशियों के आगमन की सूचना मिलते ही उन्हें देखने के लिए काफी संख्या में लोग पहुंचे।
पत्रकार पियर्स ने बताया कि डाक्यूमेंट्री का मुख्य विषय अध्यात्म रहेगा। गंगा तट पर लगने वाला मेला रामनगरिया ग्रामीण परिवेश से जुड़ा हुआ एक अनूठा धार्मिक आयोजन है। वह पहली बार वर्ष 1973 में हरिद्वार आए थे। फिर पिछले वर्ष प्रयागराज कुंभ के दौरान उन्होंने फर्रुखाबाद के पांचाल घाट पर लगने वाले मेला रामनगरिया को देखा, जो प्रयागराज कुंभ की तरह विशाल और व्यवस्थित लगता है। इसी कारण वे इस बार विशेष रूप से यहां डाक्यूमेंट्री बनाने पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि मेला रामनगरिया की शूटिंग के बाद प्रयागराज जाएंगे।