फतेहपुर। अस्पतालों में कोविड जैसे हालातों से निपटने के लिए संसाधनों की कमी नहीं है लेकिन इसे संचालित करने की व्यवस्था बहुत लचर है। वेंटीलेटर संचालन के लिए टेक्नीशियन तक नहीं हैं। जिला अस्पताल को छोड़कर अन्य जगहों पर आक्सीजन प्लांट भी बंद हैं। सालों से बंद संसाधनों की की अब तक सुध नहीं ली गई है। स्वास्थ्य विभाग के पास सारे संसाधन होते हुए भी राहत देने के इंतजाम नहीं हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चीन में फैली बीमारी को लेकर देश में भी अलर्ट जारी किया है। इसे देखते हुए प्रदेश सरकारों ने भी अस्पतालों के ऑक्सीजन प्लांट समेत सभी संसाधनों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। कोविड काल में जिला अस्पताल में आक्सीजन प्लांट तैयार करने के साथ ही आठ वेंटीलेटर लगाए गए।
पल्स, हार्ट चेक करने समेत सभी संसाधन जुटाए गए थे। ये संसाधन कोविड काल के अंतिम दिनों में लगाए गए थे। इनका कुछ दिनों तक ही उपयोग हुआ और मशीनों को एक कमरे में रखकर ताला बंद कर दिया गया। दो सालों से अधिक समय बाद ये सभी सामान कबाड़ की स्थिति में है। अलर्ट के बावजूद अब तक इनकी जांच नहीं की गई है। वहीं, महिला और पुरुष अस्पताल के आक्सीजन प्लांट जरूर चालू हैं।
प्लांट चालू होने के बाद अस्पताल के 36 आक्सीजन सिलिंडर स्टोर में रखे जंग खा रहे हैं। कोरोना जांच पैथोलाॅजी का भी यही हाल है। पैथोलाॅजी को अन्य जांचों के लिए उपयोग में लाने के बजाए बंद कर दिया गया। ऐसी ही स्थिति थरियांव सीएचसी की है। यहां 30 बेड का कोरोना अस्पताल बनाया गया था। 50 कंसेंट्रेटर भी उपलब्ध कराए गए थे। कोरोना खत्म होने के बाद कंसेंट्रेटर अस्पताल के स्टोर में रखा दिया गया है।
कोरोना अस्पताल भी अस्त व्यस्त हो गया है। ऐसा ही हाल बिंदकी सीएचसी में देखने को मिला। यहां कोविड काल में 50 बेड का वार्ड स्थापित हुआ था। 35 कंसेंट्रेटर और आक्सीजन प्लांट भी लगाया गया था। कोरोना समाप्त होने के बाद प्लांट बंद कर दिया गया और कंसेंट्रेटर स्टोर पहुंचा दिए गए। मरीजों को आक्सीजन सिलिंडर से दी जाने लगी। ऐसे में आपदा की स्थिति में सरकारी अस्पतालों में सामान उपलब्ध होते हुए भी उपचार होना कठिन है।
जिला अस्पताल में दो, खागा, बिंदकी और हथगाम में एक-एक आक्सीजन प्लांट लगाया गया था। इसके अलावा कोविड से जुड़े अन्य संसाधन भी थे। पूर्व में ही नोडल अधिकारियों को सभी संसाधनों की जांच करने के निर्देश दे चुके हैं। आक्सीजन प्लांट का मार्क ड्रिल किया जा चुका है। सभी चालू हालत में हैं। अभी किसी तरह का कोई निर्देश शासन स्तर से नहीं आया है और न ही ऐसी कोई सूचना दी गई है।
– डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ
