फतेहपुर। शहर की आबादी के मध्य गंदे पानी के तालाब मच्छर जनित बीमारियों के कारक बने हैं। बजबजाती गंदगी से संक्रामक बीमारियां फैल रही हैं। नगर पालिका ने इस समस्या को लेकर चुप्पी साध रखी है। गंदे पानी में लार्वा नाशक दवा का छिड़काव तक नहीं कराया गया। यही कारण है कि अब तक शहरी क्षेत्र में डेंगू के 15 रोगी मिल चुके हैं। तालाब के आसपास के घरों में दिन-रात मच्छरों की भरमार रहती है।
नगर पालिका के पीछे ऐतिहासिक विक्टोरिया तालाब है। घनी आबादी से घिरे इस तालाब में घरों का गंदा पानी पहुंचता है। इसी के साथ लोग घरों के निकलने वाला कूड़ा कचरा भी तालाब में डाला जाता है। दुर्गंध में रहना लोगों की मजबूरी बन चुकी है। मुंह पर कपड़ा लगाकर तालाब के पास से गुजरना पड़ता है।
सिविल लाइन और मुराइनटोला की आबादी के मध्य स्थित नवहइया तालाब में क्षेत्र की बड़ी आबादी घरों का कूड़ा-कचरा डालती है। सफाई कर्मी भी सड़कों की गंदगी इसी तालाब में डंप करते हैं। तालाब की वजह से दिन-रात मच्छरों की भरमार रहती है।
शहर की पुरानी आबादी के मध्य इमिलिहा बाग तालाब गंदगी से बजबजा रहा है। तालाब में मवेशियों की हड्डियां तक फैली हैं। घरों की गंदगी तालाब में सड़ने से आसपास का पर्यावरण पूरी तरह से दूषित है। इस तालाब के आसपास के घरों में अक्सर बीमारियां फैलती हैं।
पूरे शहर में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था लागू है, लेकिन फिर भी लोग कूड़ा तालाबों में डालकर वातावरण प्रदूषित कर रहे हैं। जल्द ही नगर पालिका तालाबों में कूड़ा डालने से रोकने के लिए कारगर कदम उठाएगी।
– राजकुमार मौर्य एडवोकेट, चेयरमैन नगर पालिका
