फतेहपुर। प्याज की आसमान चूमती कीमतों से सब्जियों का स्वाद फीका हो गया। दुकानों में बोरियों में रहने वाला प्याज अब टोकरी में सिमट कर रह गया है। अब प्याज किलो के बजाय पाव में बेचा और खरीदा जा रहा है। एक सप्ताह में फर्श से अर्स में पहुंची प्याज के भाव से गृहणियों के रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। प्याज गुरुवार को 80 रुपये किलो बाजार में बिका।
बाजार में आलू के अलावा सभी हरी सब्जियों के भाव आसमान चूम रहे हैं। इसका कारण गंगा की बाढ़ में तराई में खड़ी सब्जी की फसल नष्ट होने से लगाया जा रहा है। विलंब से बोई गई सब्जियां अभी तक तैयार नहीं हो पाई हैं। ऐसे में बाजार में बाहर से आने वाली सब्जियां उपलब्ध हैं, जो मनमानी कीमत में बिक रही हैं, लेकिन सभी सब्जियों में प्याज के भाव भारी पड़ रहे हैं। हर तरह की सब्जी का स्वाद बढ़ाने वाली प्याज की खरीद करना आम लोगों की पहुंच से बाहर हो चुका है और अभी भी प्याज के भाव घटने की उम्मीद नहीं दिख रही है। सब्जी दुकानदार राजू गुप्ता का कहना है कि इस सीजन में नासिक के प्याज की बिक्री होती है। नासिक में प्याज का भंडारण कम हो गया है। इसी लिए प्याज महंगा हो गया है। एक महीने बाद नई प्याज की फसल तैयार होने के बाद भाव सस्ते होंगे।
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दाल, सब्जियों में तड़का लगाना भी मुश्किल
प्याज के पहले से लहसुन की कीमत आसमान चूम रही हैं। 200 रुपये किलो बिक रहा लहसुन अब लोग खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। वर्तमान में लोग लहसुन की खरीद 100 से 50 ग्राम तक कर रहे हैं। अधिकांश सब्जी की दुकानों से लहसुन गायब हो चुका है।
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फोटो-04-प्रिया सिंह
सिविल लाइन निवासी प्रिया सिंह का कहना है कि प्याज के भाव आम लोगों की पहुंच से बाहर हो चुके हैं। महंगाई के कारण गृहणियों के सामने स्वादिष्ट सब्जी तैयार करना मुश्किल हो रहा है। अब केवल नाममात्र के लिए सब्जी में प्याज का उपयोग किया जा रहा है।
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फोटो-05-संजू देवी खंभापुर निवासी संजू देवी का कहना है कि प्याज के 80 रुपये किलो भाव पहुंचने से आम परिवारों की रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। हर तरह की सब्जी से लेकर दाल में तड़का लगाने में प्याज की जरूरत होती है, लेकिन महंगा प्याज खाना आम लोगों के लिए मुश्किल हो चुका है।
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