फोटो-25-जिला अस्पताल। संवाद

सफाई, एंटी लार्वा दवा के छिड़काव और फॉगिंग के लिए मिली कहां खर्च हुई, पता नहीं

हर रोज निकल रहे डेंगू मरीज, अब तक 155 पहुंची संख्या

संवाद न्यूज एजेंसी

फतेहपुर। संक्रामक बीमारियों से बचाव के नाम पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च हो गया। बुखार, डेंगू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए मोटी धनराशि कहां खर्च हुई इस पर जिम्मेदारों के पास सटीक जवाब नहीं है। आज यह हाल है कि जिले का कोई भी ब्लॉक बुखार और डेंगू से अछूता नहीं है। सफाई, एंटी लार्वा दवा के छिड़काव और फॉगिंग के लिए मिली धनराशि हवा में खर्च हो गई। अंकुश लगना तो दूर उल्टे डेंगू फैलाने वाले मादा एडीज मच्छर और सेहतमंद हो गया।

स्वास्थ्य विभाग से मिले आकड़ों के मुताबिक जिले में डेंगू मरीजों की संख्या 155 पहुंच चुकी है। अभी डेंगू के मादा एडीज मच्छर को बढ़ावा देने वाला एक महीना शेष है। स्वास्थ्य विभाग हर साल प्रत्येक ग्रामसभा को 10 हजार रुपये गांव की सफाई के साथ एंटी लार्वा के छिड़काव के लिए आवंटित करता है। जिले की कुल 816 ग्राम पंचायतों में गंदगी और मच्छरों से पैदा होने वाली बीमारियों से बचाव के लिए पहले ही ग्राम प्रधान और एएनएम के संयुक्त खाते में 84 लाख की धनराशि भेजी जा चुकी है।

करीब ढाई महीने से फैल रहे डेंगू की रोकथाम के नाम पर आठ लाख रुपये से अधिक का एंटी लार्वा और घरों के अंदर दवा का छिड़काव कराया जा चुका है। इसमें हर रोज मलेरिया विभाग की टीम को क्षेत्र में कहीं न कहीं दवा छिड़काव के लिए निकलना पड़ रहा हैं। ऐसे में करीब एक करोड़ की धनराशि खर्च होने के बावजूद डेंगू के डंक पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। जिले में अब तक 155 डेंगू रोगियों की पुष्टि हो चुकी है।

जिला मलेरिया अधिकारी सुजाता ठाकुर का कहना है कि ग्राम सभा को आवंटित बजट की जवाब देही प्रधान की होती है। जिस गांव में डेंगू की पुष्टि होती है, मरीज के घर के आसपास 50 घरों में डेंगू मच्छर खोजकर नष्ट करने, आसपास के 50 घरों में एंटी लार्वा का छिड़काव के साथ फॉगिंग कराना उनकी जिम्मेदारी में है। इसके अलावा ग्रामीणों को भी सफाई के लिए जागरूक किया जाता है। अधिक गंदगी होने पर रिपोर्ट सीएमओ को भेजी जाती है।

इनसेट

पांच मिली पानी में पैदा हो सकता डेंगू

तीन दिन तक पांच मिली. स्वच्छ पानी में डेंगू मच्छर पैदा हो सकता है। डेंगू मच्छर 18 से 36 डिग्री तापमान पैदा होने के साथ तेजी के साथ बढ़ता है। ऐसा तापमान अगस्त से लेकर नवंबर महीने तक रहता है।

मलेरिया ने भी पसारे पैर

डेंगू के साथ जिले में मलेरिया रोगियों की संख्या भी बढ़ना शुरू हो गया है। अब तक जिले में मलेरिया रोगियों की संख्या 14 पहुंच चुकी है, जो पिछले साल के मलेरिया रोगियों की संख्या से छह अधिक है।

मरीज(डेंगू) अबतक

2023-155

2022-91

2021-36

2020-75

(आंकड़ा मलेरिया विभाग)

…………………….

फोटो-24-गंगूपुर में सड़क पर भरा कीचड़। संवाद

सफाई, एंटी लार्वा का छिड़काव, फॉगिंग भी नहीं हुई

परसेढ़ा के मजरा गंगूपुर के पड़ताल में खुली पोल

संवाद न्यूज एजेंसी

अमौली। क्षेत्र के परसेढ़ा गांव में बुखार एवं डेंगू के मरीज बढ़ने पर स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर सर्वे कराकर कैंप लगाया। मरीजों का परीक्षण कर दवाएं वितरित की गईं। साथ ही सफाई, एंटी लार्वा दवा का छिड़काव व फॉगिंग के लिए निर्देश हुए थे, लेकिन पड़ताल करने पर गांव के सर्वेश कुमार, रामनाथ, धर्मपाल ने बताया कि एक दो गलियों में एंटी लार्वा का छिड़काव हुआ है। फॉगिंग कहीं नहीं हुई है। इसी तरह मजरा गंगूपुर के कैलाश चंद्र, उमेश कुमार, करन सिंह ने बताया कि यहां पर सफाई हुई और न ही एंटी लार्वा का छिड़काव कराया गया और न ही फॉगिंग की गई। सभी कुछ कागजों में हो गया। प्रधान इंदल निषाद ने बताया कि सफाई कर्मियों से सफाई कराई गई है तथा मलेरिया विभाग ने एंटी लार्वा का छिड़काव कराया है।

चेन तोड़कर बीमारी रोक सकते हैं

डेंगू का डंक एक से दूसरे में फैल जाता है। इसकी चेन तोड़कर ही बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। इसके लिए मरीज के आसपास संभावित क्षेत्र को पूरी तरह से डेंगू मुक्त करके ही सफलता हासिल की जा सकती है।



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