फतेहपुर। जिले के 816 में 351 गांव के प्रधान की बागडोर महिलाओं के हाथों में है, वहीं 13 में आठ महिलाएं ब्लाक प्रमुख हैं। जिले में इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं का प्रतिनिधित्व निश्चित ही महिला सशक्तिकरण का बेमिसाल उदाहरण है, लेकिन उनके अधिकार अभी भी पुरुषों के हाथों में हैं। अधिकांश महिला प्रधान व ब्लाक प्रमुख के कामकाज अब भी पुरुष ही संभाले हैं। ये सभी सरकारी व अन्य आयोजनों में बतौर ब्लाक प्रमुख व प्रधान की हैसियत से ही शामिल होते हैं। इसका खुलासा डीएम की मौजूदगी में ही हुआ। डीएम के सामने महिला की जगह पुरुष प्रधान बनकर घंटों उनके साथ आगे-पीछे चलता रहा। इसकी भनक तक अधिकारियों को नहीं लगी। डीएम को एक शिकायत पत्र से गांव की प्रधान महिला होने की जानकारी हुई, तो पूरा मामला साफ हुआ। डीएम के सामने ही महिला सशक्तिकरण के परिणाम की पोल खुल गई। डीएम के निर्देश पर अब जांच बैठ गई है।
ब्लाक तेलियानी के ग्राम पंचायत अलादातपुर में डीएम सी. इंदुमती बुधवार को योजनाओं और विकास कार्यों के निरीक्षण कर रहीं थीं। इस बीच उनके साथ बतौर प्रधान बनकर नरेंद्र कुमार साथ-साथ मौजूद रहा। इस बीच एक ग्रामीण ने गांव की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर डीएम को शिकायत पत्र सौंपा। उसमें ग्राम प्रधान का सहमति पत्र भी लगा था, जिसमें ग्राम प्रधान अंजू देवी का नाम अंकित था। इस पर डीएम ने जानकारी ली, तो पता लगा कि गांव की प्रधान महिला ही है। नरेंद्र कुमार पूर्व प्रधान है और वह ही प्रधानी का संचालन करता है। इस पर डीएम ने नाराजगी भी जाहिर की और उसे मौके से चलता कर दिया। इस मामले पर जांच बैठा दी गई है। ये एक महज नजीर है। ऐसे न जाने कितने मामले जिले में हैं, जहां महिलाएं घर गृहस्थी तक ही सीमित हैं। कई महिलाएं चुनाव जरूर लड़ी, लेकिन उन्होंने ग्राम पंचायत का मुंह तक नहीं देखा। खंड विकास अधिकारी राहुल मिश्रा ने बताया कि ग्राम पंचायत अधिकारी अरविंद कुमार पटेल को नोटिस जारी किया गया है। जवाब मिलने के बाद तुरंत अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
ऐसा नहीं है कि हर महिला जनप्रतिनिधि का कार्य पति या प्रतिनिधि के सहारे चल रहा है। वह स्वयं ही पूरा कामकाज संभाल रही हैं, ऐसी ही सुशीला सिंह हैं। वे अमौली ब्लाक से ब्लाक प्रमुख हैं। उनके कामकाज में पति या अन्य किसी का कोई हस्तक्षेप नहीं है। वे हर कार्य में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती हैं। ब्लॉक के विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका रहती है। वे व्यक्तिगत अपने ब्लाक की जनता से मिलती हैं। ऐसी अन्य कई जनप्रतिनिधि भी हैं, जो महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा हैं।
चुनी गईं महिला ग्राम प्रधानों को खुद काम करना होगा। उन्हें ही ग्राम पंचायत की सभी बैठकों में शामिल होना होगा। महिला प्रधानों की जगह यदि उनके पति, बेटा या अन्य पुरुष मिनी सचिवालयों में बैठे। उनका काम करते नजर आए तो पंचायती राज एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। शासन की ओर से इसके लिए सरकारी आदेश जारी किया जा चुका है।
जिले में साढ़े तीन सौ से अधिक महिलाएं ग्राम पंचायत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। ये महिला सशक्तिकरण का स्वस्थ उदाहरण है। सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश हैं कि महिला की जगह कोई पुरुष बैठक व कार्यक्रमों हिस्सा नहीं लें। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई की जाए। विशेष परिस्थितियों (बीमारी या अन्य) पर ही पहले से लिखित सूचना देकर कभी-कभार हिस्सा ले सकते हैं। हमारी ओर से प्रधान महिलाओं की कैपिसिटी बिल्डिंग का काम किया जा रहा है। महिलाएं सक्षम होकर अपने कामकाज को बेहतर तरीके से संभालें।
सूरज पटेल, सीडीओ
