फतेहपुर/असोथर। प्रदूषण रोकने के लिए एक ओर पराली जलाने वालों पर प्रशासन लगातार सख्ती बरत रहा है। दूसरी ओर मानक विहीन संचालित कोयला भट्ठियां बेखौफ होकर प्रदूषण फैला रही हैं।

असोथर ब्लॉक व थाना क्षेत्र के रामनगर कौहन समेत अन्य जगहों पर कई भट्ठियों की धधक ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गई है। थाना क्षेत्र के रामनगर कौहन, मनावा और ब्लॉक क्षेत्र के दतौली, ललौली थाना क्षेत्र के ललौली और कोर्रा कनक गांव में करीब 50 मानक विहीन कोयला भट्ठियां हर दिन बड़े पैमाने पर धुआं उगलते हुए पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहीं हैं।

असोथर थाना क्षेत्र में एक भट्ठी संचालक एक लाइसेंस लेकर कई अवैध मानक विहीन कोयला भट्ठियों का संचालन कर रहे हैं। कोयला भट्ठी संचालन के लिए संबंधित विभाग और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से पहले हरे पेड़ों को धराशायी किया जाता है, फिर भट्ठियों में बिना मार्का लगाए कोयला बनाया जाता है।

कोयला भट्ठी संचालन के लिए वन विभाग से लाइसेंस निर्गत किया जाता है। कोयला भट्ठी के जारी लाइसेंस में कई शर्तों का उल्लेख भी रहता है। इन शर्तों में वन क्षेत्र से 10 किलोमीटर और आबादी से एक किलोमीटर दूर कोयला भट्ठियों का संचालन होना चाहिए। आग की घटनाओं को रोकने के लिए संयंत्र और पानी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। इसका पालन नहीं किया जा रहा है।

इस व्यापार से जुड़े लोग एक दो भट्ठियों का वन विभाग से लाइसेंस लेकर उसकी आड़ में कई कई भट्ठियों का संचालन खुलेआम करते हैं। कोयला भट्ठियों से निकलने वाला धुएं की चादर से आसमान ढक जाता है। धुएं से आंखों में जलन, आंखों और शरीर में खुजली, सांस लेने की समस्या समेत कई तरह की बीमारियां भी फैल रही है।

जिले में संचालित काेयला भट्ठियों की जांच की जाएगी। अवैध भट्ठियों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी। डीएफओ से वार्ता कर अभियान चलाया जाएगा।

– राकेश शर्मा, एसडीओ, वन विभाग।



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