फतेहपुर। उद्योग लगाने के पहले ही चरण में जिला कोसों दूर है। इन्वेस्टर्स समिट-2 के दौरान पहले चरण में छह महीने के भीतर 34 उद्योग स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था। आठ महीने बीत जाने के बाद महज पांच उद्योग ही स्थापित हो सके हैं। उद्यमियों के लिए तैयार की गई जमीन पर उद्योग लगाने में प्रशासनिक अमला असफल साबित हो रहा है।
प्रदेश सरकार ने उद्यमियों को बेहतर माहौल देकर उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित किया। फरवरी माह में इंवेस्टर्स समिट-2 में उद्यमियों ने रूचि दिखाई। समिट में 113 एमओयू हुए और 25.01 अरब रुपये के निवेश का अनुबंध हुआ। दावा किया गया कि उद्योग लगने से करीब 4500 लोगों को रोजगार मिलेगा। एमएसएमई में 56 उद्यमियों ने करीब 675 करोड़ के एमओयू साइन किए थे। पहले चरण में 580 करोड़ से 34 उद्योगों को छह महीने में लगाने का लक्ष्य रखा गया। उद्योग न लग पाने की बड़ी वजह जमीन की उपलब्धता नहीं होना है। कागजी प्रक्रिया भी लंबी है। एमएसएमई के कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने इच्छुक उद्यमियों को महज 72 घंटे के भीतर प्रशासन कागजी प्रक्रिया पूरी कर अनुमित पत्र जारी कर देने की बात कही थी।
इंवेस्टर्स समिट में सिग्मा मेटल एंड पॉवर लिमिटेड उद्योग में सरिया बनने का काम शुरू कर दिया है। उद्योग के जरिए 80 लोगों को रोजगार दिया गया है। श्रीराम इंडस्ट्रीज में भी पुराने टायरों को गलाकर तेल निकालकर टायर प्यरोलिसिस का काम होता है। यहां 250 लोगों को रोजगार मिला है। दोनों फैक्टरी मलवां औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित की गई हैं। इसी तरह एमएलएमपी फूड इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, अमन गोल्ड इंडस्ट्रीज और भोले बाबा आर्गेनिक के संचालन की बात कही जा रही है। इनसे लगभग 500 लोगों को रोजगार मिला है।
समिट-2 में 113 उद्यमियों ने उद्योग स्थापित करने के लिए एमओयू साइन किया था। अब महज 50 उद्यमियों ने ही उद्योग लगाने में रूचि दिखाई है। वे उद्योग लगाने के लिए जमीन और अन्य दस्तावेज पूरे करने में लगे हैं। कई उद्यमियों ने जमीन खरीदी भी ली है। दरअसल उद्यमी एमओयू में उद्योग लगाने की समय-सीमा भी तय करते हैं। वे रोजगार लगाने में कई सालों का समय भी मांग लेते हैं।
दो उद्योगों में उत्पादन पूरी तरह से चालू हो गया है। तीन उद्योग संचालित होने की प्रक्रिया में हैं। लगभग 50 उद्योगों को स्थापित करने का काम जारी है। जिले में उद्योग लगाने में रूचि दिखाने वाले उद्यमियों का विभाग पूरा सहयोग कर रहा है।
– चंद्रभान सिंह, उपायुक्त, उद्योग विभाग
