खदान में हिस्सेदार बनाने का झांसा देकर कारोबारी से हड़पी रकम

संवाद न्यूज एजेंसी

फतेहपुर। मौरंग खदान में हिस्सेदार बनाने का झांसा देकर फर्म संचालकों ने कारोबारी से एक करोड़ 21 लाख की रकम हड़प ली। रकम मांगने पर जान से मारने की धमकी दी। मामले में कोतवाली पुलिस ने खदान के 11 संचालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।

धाता थानाक्षेत्र के गोपालपुर निवासी सत्येंद्र सिंह ने एफआईआर में बताया कि वह एक नवंबर 2017 को कचहरी आए थे। यहां उनकी मुलाकात कौशांबी जिले के चक्रनगर प्रथम निवासी मौरंग कारोबारी पूर्व परिचित प्रेमचंद्र केसरवानी से हुई थी। उनका कई लोगों का सिंडीकेट है। सभी लोग मिलकर मौरंग खदान चलाते हैं।

खदान में हिस्सेदार बनाकर रुपये कमाने लालच दिया। उसके घर प्रेमचंद्र केसरवानी छह नवंबर 2017 को अपने साथियों पंजाब अमृतसर के सुल्तानबिंद थाने के रामनगर निवासी जयदीप सिंह, अमृतसर चौक माल रोड कवन निवासी अमरवीर सिंह, पंजाब के तरनतारण निवासी हरविंदर सिंह उर्फ काके, अमृतसर कबीर पार्क तेजबहादुर नगर निवासी बलजीत सिंह, मेरठ जिला दादग्रान निवासी नफीस अहमद, मेरठ के मोहराबोट निवासी रईस अहमद, गाजियाबाद संजय नगर निवासी जानवेंद्र सिंह चौहान, संदीप भाटिया, गाजियाबाद साहिनी सिद्दकी नगर निवासी पंकज त्यागी, गाजियाबाद वैशाली के वृंदावन अपार्टमेंट निवासी जितेंद्र सिंह पनवार पहुंचे।

बातचीत के बाद एक साथ काम करने की राय बनी। मौरंग घाट का टेंडर कुंवर इंफ्रा डेवलपर्स प्रा.लि. और मंगल इंफ्रा रियल्टी प्रा. लि. ने डाला। इन लोगों ने फर्म के खातों में रुपये डलवाने के बाद हिस्सेदारी की लिखापढ़ी की बात कही। उसने अपने और पत्नी के खाते से दोनों फर्मों के खातों में एक करोड़ 41 लाख रुपया ट्रांसफर किया।

रकम ट्रांसफर होने के बाद पार्टनर डीड तैयार करने में हीलाहवाली करने लगे। कई बार कहने के बाद भी रकम की लिखापढ़ी नहीं हुई। रकम मांगने पर उसे 20 लाख रुपये लौटाए। बाकी रकम एक करोड़ 21 लाख देने में आनाकानी करने लगे। वह लोग सात अक्तूबर 2023 को सभी लोग कचहरी में मिले। उसने रकम देने का दबाव बनाया। उसे जान से मारने की धमकी देकर रकम लौटाने से मना कर दिया।

कोतवाल शमशेर बहादुर सिंह ने बताया कि मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई है। प्रेमचंद्र केसरवानी और काके कई लोगों को हिस्सेदार बनाने का झांसा देकर रकम हड़प चुके हैं। इनका कौशांबी, बांदा और जिले में सिंडीकेट चलता है। पहले भी आरोपियों पर धोखाधड़ी, गबन के मुकदमे दर्ज हो चुके हैं।



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