फोटो-13-बेंदा यमुना पुल की मरम्मत कर रहे कर्मचारी। संवाद
– 20 दिनों से काम की रफ्तार बढ़ी, चिल्ला पुल पर कम होगा वाहनों का भार
– अक्सर लगने वाले जाम की समस्या से मिलेगी निजात
संवाद न्यूज एजेंसी
बहुआ। ललौली मार्ग पर जल्द जाम की समस्या से निजात मिलेगी। जर्जर बेंदा-यमुना पुल मरम्मत का 65 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। काम की रफ्तार से उम्मीद जताई जा रही है कि दिसंबर के दूसरे या तीसरे सप्ताह से छोटे चार पहिया वाहन यहां फर्राटा भरेंगे। इससे बहुआ से ललौली मार्ग पर यातायात का भार कम होगा।
31 अक्तूबर तक पुल का 50 प्रतिशत काम पूरा हुआ था और नवंबर के 20 दिन में करीब 15 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। यमुना पुल में मरम्मत का काम देख रही संस्था सन फील्ड मोरेर इंडिया लिमिटेड कंपनी के कर्मचारी दिन-रात पुल की मरम्मत में लगे हैं।
24 में 15 पिलरों में बियरिंग बदली जा चुकी है। नौ पिलरों का काम लगभग 10 दिनों में पूरा होने की उम्मीद है। वहीं, पुल के ऊपरी भाग पर क्षतिग्रस्त सड़क पर सरिया का जाल बिछाकर सीसी की ढलाई शुरू कर दी गई है। सड़क पर लगे लोहे के एंगल हटाकर नए एंगल लगाए जा रहे हैं। ये सभी काम अगले 30 दिनों में पूरे कर लिए जाएंगे।
10 दिनों के ट्रायल के बाद छोटे वाहनों के आवागमन के लिए पुल खोल दिया जाएगा। मार्च में दतौली-बेंदा यमुना पुल की मरम्मत पूर्ण होने पर यातायात व्यवस्था पूरी तरह से पटरी पर आएगी। बड़े वाहनों के संचालन से बहुआ में जाम की समस्या से निजात मिल जाएगी।
छह महीने से हो रही मरम्मत
43 साल पुराने दतौली पुल की मरम्मत एक जून 2023 से शुरू हुई थी और सितंबर में पूरा होनी थी, लेकिन एनएचएआई की कार्यदायी संस्था सन फील्ड मोरेर इंडिया कंपनी समय से काम पूरा नहीं करा पाई। हालांकि इस पीछे बजट की कमी के साथ अन्य कारण भी थे।
मार्च से बंद है आवागमन
सेतु निगम प्रयागराज और दिल्ली से सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट की सर्वे टीम ने दतौली पुल को जर्जर घोषित कर दिया था। प्रशासन ने मार्च से भारी वाहनों के आवागमन के लिए रोक लगा रखा है। भारी वाहनों को बहुआ कस्बे से ललौली होकर चिल्लापुल से डायवर्ट किया गया है।
कोट
सन फील्ड मोरेर इंडिया लिमिटेड कंपनी के कर्मचारी पुल की मरम्मत का काम कर रहे हैं। 65 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। दिसंबर के अंत तक पुल के ऊपरी भाग का काम भी पूरा हो जाएगा। इसके बाद भार की जांच (लोड टेस्ट) कराकर छोटे वाहनों के लिए पुल खोल दिया जाएगा।-आयुष्मान कुमार, इंजीनियर एनएचएआई
