
बेटी को जूस पिलाता पिता और डॉक्टरों की टीम
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बेटी को यूट्रेस कैंसर हो गया था। दोनों किडनी भी खराब थीं। तीन साल से दिल्ली के एम्स से लेकर लखनऊ के नामीगिरामी अस्पतालों तक दौड़ा पर सबने ऑपरेशन के लिए मना कर दिया था। बिटिया को दर्द के इंजेक्शन देने पड़ते थे। एक समय ऐसा आया कि इंजेक्शन भी बेअसर हो गए। बिटिया की स्थितियां इतनी दयनीय हो गईं कि कलेजे पर पत्थर रखकर मैं डॉक्टरों से कहने लगा कि उसे मौत का इंजेक्शन लगा दें।
उसे इस असहनीय दर्द से उसे मुक्ति मिल सके। हैलट पहुंचा, तो यहां की डॉक्टर बिटिया के लिए भगवान बन गईं। उन्होंने सर्जरी की, तो बिटिया स्वस्थ हो गई। यह कहते-कहते जूही निवासी पिता की आंखें भर आईं। पिता ने बताया कि तीन साल पहले 23 साल की बेटी को पेट में दर्द हुआ था। उसे लखनऊ के फातिमा अस्पताल में भर्ती कराया।
