अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय (बीयू) के तीनों ब्वायज हॉस्टलों में कटखने बंदरों का खौफ है। यदि कोई छात्र अकेले निकलता है तो बंदरों का झुंड हमलाकर उसे घायल कर रहा है। अगस्त में अब तक 25 छात्र घायल हो चुके हैं। कई जख्मी छात्रों को परिजन घर ले गए हैं। वहीं, विवि प्रशासन का कहना है कि कई बार नगर निगम और वन विभाग को पत्र लिखा जा चुका है मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
विवि परिसर में बने समता हॉस्टल में 110 छात्र, लॉर्ड बुद्धा हॉस्टल में 130 और सरदार बल्लभ भाई पटेल हॉस्टल में 30 छात्र रहते हैं। इनमें कई नव प्रवेशित छात्र भी हैं। इन हॉस्टलों के आसपास बंदरों का आतंक मचा हुआ है। स्थिति यह है कि यदि कोई छात्र कमरे का दरवाजा खुला छोड़ देता है तो बंदर घुसकर सामान नष्ट कर देते हैं। इसकी वजह से छात्र हमेशा दरवाजे बंद रखते हैं। हालत यह है कि छात्र एकजुट होकर हाथ में डंडा लेकर निकलते हैं।
वार्डन प्रो. विनीत कुमार ने बताया कि अगस्त में 25 छात्रों को बंदर हमला कर या काटकर घायल कर चुके हैं। जिन छात्रों को बंदरों ने ज्यादा घायल किया, उन्हें परिजन फिलहाल अपने साथ ले गए हैं। कई बार विवि प्रशासन नगर निगम और वन विभाग को पत्र लिखकर बंदरों के आतंक से राहत दिलाने की मांग कर चुका है मगर कोई राहत नहीं मिली है।
छात्रों ने बताई पीड़ा
पांच दिन पहले मैं पढ़ाई करके हॉस्टल लौट रहा था, तभी बंदरों ने हमला कर दिया। किसी तरह से भागा तो एक बंदर ने घुटने के पास काट लिया। – शिवांशु तिवारी, बीएससी बायोटेक
पांच दिन पहले हॉस्टल से सामान खरीदने जा रहा था, तभी बंदरों ने हमला कर दिया। भागते समय बंदर ने झपट्टा मारा तो गहरे पंजे लगने से खून आ गया। – अमन यादव, बीसीए छात्र
हॉस्टल से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। खाने-पीने का सामान ले जाना संभव नहीं। न सिर्फ बंदर काटते हैं बल्कि सामान तक छीनकर ले जाते हैं। – अमर सिंह, बीटेक
हॉस्टल का दरवाजा खुले रहने का मतलब है कि सामान नष्ट हो जाएगा। बंदरों का इतना ज्यादा आतंक है कि कोई भी अकेले निकलने की बात सोच नहीं सकता। – आदर्श पाल, बीएससी माइक्रोबायलॉजी
वर्जन
बीयू के हॉस्टल में बंदरों का आतंक है। कई छात्रों को बंदर हमलाकर काट चुके हैं। नगर निगम और वन विभाग को पत्र लिख चुके हैं। – विनय कुमार सिंह, कुलसचिव बीयू
वन्य जीव अधिनियम से जब से बंदरों को हटाया गया है, तब से बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर निकाय की तय की गई है। – राज नारायण, क्षेत्रीय वन अधिकारी
