अमेठी सिटी। रबी के सीजन में फसलों की बोआई व तैयार करने में अंधाधुंध उर्वरकों का प्रयोग मिट्टी की सेहत बिगाड़ रहा है। जिले की मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, जिंक व सल्फर की कमी है। ऐसे में जानकारी के अभाव में किसान उन पोषक तत्वों की कमी न दूर कर सिर्फ उर्वरकों को डाल देते हैं। ऐसे में उत्पादन व मिट्टी दोनों खराब हो रहे हैं। कंपोस्ट व हरी खाद का प्रयोग कर खेतों की मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी दूर की जा सकती है।
जिले में रबी के सीजन में फसलों की बोआई के समय डीएपी की मारामारी है। हालात के अनुसार जिले के किसान फसलों की बोआई में सिर्फ ऑर्गेनिक उर्वरकों पर ही निर्भर हैं। किसानों को रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग को कम करने व फार्म यार्ड मैन्योर विधि अपनाने की विशेषज्ञ सलाह देते हैं। जिले में देखा जाए तो अंधाधुंध डीएपी आदि के प्रयोग से मृदा की सेहत बिगड़ी है।
ताला भीटा पर संचालित जिला स्तरीय मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में मृदा परीक्षण के दौरान आई रिपोर्ट चिंताजनक है। वर्ष 2022-23 में 20,928 मृदा नमूनों का, वर्ष 2023-24 में 7,800 मृदा नमूनों व इस वर्ष 2024-25 में 13,000 मृदा नमूने एकत्रित कर उनका परीक्षण किया गया। इस वर्ष परीक्षण के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी वितरित किए गए। जिसमें उनके खेतों में किस पोषक तत्व की कमी व अधिकता है, वह दर्शाया गया है। जिले की सभी ब्लॉकों में ऑर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, जिंक व सल्फर की कमी है। विशेषज्ञ इसे दूर करने के लिए कंपोस्ट व हरी खाद का ज्यादा प्रयोग करने पर जोर दे रहे हैं।
भादर ब्लॉक में सबसे अधिक ऑर्गेनिक कार्बन की कमी
इस वर्ष मृदा परीक्षण जिले की सभी 13 ब्लॉकों में किया गया। सभी ब्लॉकों में ऑर्गेनिक कार्बन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, जिंक व सल्फर की कमी पाई गई। लेकिन ब्लॉक भादर में अन्य पोषक तत्वों के अलावा ऑर्गेनिक कार्बन सबसे अधिक कम मिला।
चिंता छोड़ खुद सुधारें मिट्टी की सेहत
जिला मृदा परीक्षण के प्रभारी इंचार्ज अनिल कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि गोबर की कंपोस्ट खाद व खेतों में हरी खाद बनाकर पोषक तत्वों की कर्मी को दूर किया जा सकता है। कहा कि ऑर्गेनिक कार्बन की कमी को दूर करने के लिए ज्यादा कंपोस्ट खाद व खेतों में हरी खाद का प्रयोग करें। इससे नाइट्रोजन की भी कमी दूर होगी। जहां फास्फोरस की कमी है वहां सिंगल सुपर फास्फेट व एनपीके का प्रयोग करें तो बेहतर होगा। जिंक की कमी को दूर करने के लिए जिंक सल्फेट व सल्फर की कमी को दूर करने के लिए सल्फर कर प्रयोग करें। बताया कि सरसों की फसल में डीएपी का प्रयोग न कर सिंगल सुपर फास्फेट व सल्फर का प्रयोग करने से बेहतर परिणाम मिलेंगे।
