उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में यात्रियों की सुरक्षा में गंभीर लापरवाही सामने आई है। बसों में लगाए गए फर्स्ट एड बॉक्स सिर्फ दिखावटी बनकर रह गए हैं। अधिकांश बसों में या तो बॉक्स खाली हैं या फिर उनका कोई अता-पता नहीं है।
यह स्थिति केवल हाथरस डिपो तक सीमित नहीं है, बल्कि खुर्जा, फाउंड्रीनगर, नरौरा और अलीगढ़ सहित प्रदेश के कई अन्य डिपो की बसों में ऐसे ही हालात देखने को मिलते हैं। परिवहन निगम द्वारा दवा किट केवल चुनाव और कुंभ मेला जैसे विशेष अवसरों पर ही बसों में उपलब्ध कराई जाती है। नई किट में सामान्य बीमारियों जैसे उल्टी-दस्त, बुखार व ब्लड प्रेशर की दवाओं के साथ चोट के इलाज के लिए बीटाडीन, पट्टी और बैंडेज शामिल होते हैं, लेकिन नियमित संचालन के दौरान इनका अभाव बना रहता है।
अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों द्वारा दवाएं निकाल लिए जाने के कारण बसों में किट नहीं रखी जातीं और जरूरत पड़ने पर बस स्टैंड पर दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, लेकिन सवाल यह है कि यदि आपात स्थिति में बस में सवार किसी यात्री की तबीयत बिगड़ जाती है तो उसे मौके पर प्राथमिक उपचार कैसे मिलेगा।
दरअसल बॉक्स बने हुए हैं। इसमें दवाओं का रिव्यू नहीं हो पाता था, इसलिए मेनुअल बना था कि परिचालक ड्यूटी पर आए तो दवा लेकर रूट पर जाए और लौटकर उसे जमा करा दें। हो सकता है कि ऐसा न हो रहा हो। चुनाव के दौरान हम बसों में दवाएं मुहैया कराते हैं। अभी तक इस ओर ध्यान नहीं था। हम इस संबंध में निर्देश जारी करेंगे कि रूट पर बसों की जांच के समय फर्स्ट एड बॉक्स आदि की भी जांच की जाए। -अनिल कुमार, महाप्रबंधक, उत्तर प्रदेश परिवहन निगम।
