श्रावस्ती। उद्योग शून्य जिले में आवागमन के साधनों का अभाव निवेशकों की राह रोक रहा है। जिले के साथ मिले बसों के बेड़े भी अब एक-एक कर मार्ग से गायब हो रहे हैं। वहीं करोड़ों रुपये की लागत से बने बस अड्डे भी बसों के न आने से निष्क्रिय साबित हो रहे हैं। वहीं मार्ग से संचालित होने वाली बसों से यात्री हर मौसम में परेशान हो रहे हैं।
उद्योगों के नाम पर जिले में नाम मात्र कुटीर उद्योग ही है। ऐसे में रोजी रोजगार के लिए जिलेवासियों को अन्य महानगरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है। प्राकृतिक व वन संपदा से परिपूर्ण इस जिले में निवेश के तमाम अवसर मौजूद हैं, लेकिन आवागमन के साधनों के अभाव में निवेशक जिले में आने से कतरा रहे हैं। 22 मई 1997 को जिला गठन के बाद तत्कालीन परिवहन मंत्री राम अचल राजभर ने 26 बसों का बेड़ा जिले को प्रदान किया था। सत्ता परिवर्तन के बाद जहां एक-एक कर मार्ग से निगम की बसें कम हो गईं। वहीं ई रिक्शा, टेंपो व डग्गामार वाहनों के रूट निर्धारण न होने व नुकसान के कारण ज्यादातर निजी बस संचालकों ने भी अपनी बसें मार्ग से हटा लीं।
आलम यह है कि दोपहर बाद तहसील मुख्यालय जमुनहा व इकौना से भिनगा के लिए कोई सेवा नहीं मिलती है। वहीं भिनगा से इकौना व जमुनहा जाने के लिए पांच बजे के बाद कोई साधन नहीं मिलता। बहराइच मार्ग को निर्विवाद छोड़ दिया जाए तो शेष प्रयागराज, वाराणसी, लखीमपुर खीरी आदि मार्ग के लिए कोई बस नहीं मिलती है। सिर्फ गोंडा के लिए सुबह 10 बजे व बलरामपुर के लिए सुबह पांच बजे मात्र एक एक बस ही संचालित है। ऐसे में निवेशकों के किनारा कर लेने से जिले में विकास का पहिया थमा हुआ है।
डिपो की भूमि पर बस अड्डा बना डग्गामारों का अड्डा
भिनगा में दीवानी न्यायालय गेट के सामने दूसरी पटरी पर परिवहन निगम डिपो स्थापना के लिए पांच एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। जिस पर डिपो न बनाकर अस्थायी बस अड्डा बना दिया गया। जहां से पूरे दिन में मात्र सात बसों का ही फेरा होता है। वहीं शेष भूमि का आसपास के लोग निजी उपयोग कर रहे हैं। इतना ही नहीं बौद्ध परिपथ किनारे बसे इकौना व गिलौला में परिवहन निगम का बस अड्डा मौजूद है, जहां बसें नहीं जाती। ऐसे में यात्रियों को आवागमन के लिए मार्ग की पटरियों पर खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है। जबकि बस अड्डे का उपयोग डग्गामार वाहन संचालक व स्थानीय लोग कर रहे हैं।
घोषणा तक ही सीमित रहा पीपीपी मॉडल का बस अड्डा
बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में बौद्ध अनुयायी आते हैं। इनकी सुविधा के लिए जहां श्रावस्ती में एयरपोर्ट स्थापित कर सप्ताह में दो दिन हवाई सेवा शुरू की गई है। वहीं जिले में रेल लाइन बिछाने की परियोजना पर काम किया जा रहा है। इसके विपरीत कटरा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से अपने प्रथम कार्यकाल में पीपीपी मॉडल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का बस अड्डा स्थापित करने की घोषणा की गई थी। इसके लिए भूमि का चयन भी किया गया था, लेकिन यह घोषणा सिर्फ घोषणा तक ही सीमित रहा।
