मथुरा में बाढ़ से बर्बादी का मंजर अब दिखने लगा है। भले ही बीते दिनों से जलस्तर में प्रति घंटे एक सेंटीमीटर की कमी दर्ज की जा रही है, लेकिन बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही अब पीड़ितों के सामने अपने आशियाने बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। पानी कम होने के बाद घर दरक रहे हैं और फर्श धंस रहे हैं। वहीं, फसलें नष्ट होने से किसानों के अरमानों पर आफत का पानी फिर गया। दर्जनों गांव और कॉलोनियां अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं और बाढ़ से विस्थापित लोग चुनौतियों से जद्दोजहद कर रहे हैं। घरेलू सामान बर्बाद हो चुका है।

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flood in mathura: crops and houses damaged due to flood MP Hema Malini inspected flood relief camp

मथुरा में बाढ़।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


इस आपदा से सबसे बड़ा कहर किसानों पर बरपा है। बाढ़ के पानी से 33 गांवों की फसलें पूरी तरह से नष्ट हो चुकी हैं, जिससे किसानों की उम्मीदें पानी में बह गईं। खेतों में लहलहाती फसलें अब सिर्फ कीचड़ और मलबे का ढेर बन गई हैं। जलस्तर में कमी के बावजूद, अभी भी दर्जनों गांव पूरी तरह से पानी में डूबे हैं। इधर, मथुरा-वृंदावन में दर्जनों कॉलोनियां अभी बाढ़ की चपेट में हैं।

 


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मथुरा में बाढ़।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


हालांकि जलस्तर कम होने से दो-दो फीट पानी कम हुआ है। जयसिंहपुरा, लक्ष्मीनगर क्षेत्र के तिवारी पुरम, ईसापुर और हंसगंज में अभी भी हालात विकराल हैं, जहां पानी कम हुआ है वहां अब मकानों को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। घरों में कई दिन तक पानी भरने के कारण कीमती सामान खराब हो गया है। 

 


flood in mathura: crops and houses damaged due to flood MP Hema Malini inspected flood relief camp

मथुरा में बाढ़।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


मकानों के फर्श धंस गए हैं और पक्की गलियां जर्जर हो गई हैं। दीवारों पर भी दरारें आ गई हैं। राशन का सामान खराब हो चुका है। लोग घर वापस लौटने लगे हैं और घर की मरम्मत कराना शुरू कर दिया है। घरों के बाहर सफाई कार्य में जुट गए हैं। हालांकि प्रभावित क्षेत्रों में बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं।

 


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मथुरा में बाढ़।
– फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी


एडीएम डाॅ. पंकज वर्मा ने बताया कि मंगलवार से लगातार यमुना का जलस्तर कम हो रहा है। बृहस्पतिवार शाम चार बजे प्रयाग घाट का 166.72 मीटर दर्ज किया गया है। हथिनीकुंड से 24479 क्यूसेक और ओखला से 47490 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं गोकुल बैराज से 1.18 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है। 

 




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