संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ

Updated Sat, 30 Aug 2025 02:33 AM IST

For the last five years, we have been making Gajanan out of coconut bark and paper and establishing it

पंडाल में स्थापित नारियल के छाल व पेपर से बनी गणपति मूर्ति। स्रोत: संवाद 



लखनऊ। गणेशोत्सव की धूम पूरे शहर में देखने को मिल रही है। शहरवासियों की सुविधा के लिए हमारे बप्पा कॉलम में हम आपको अलग-अलग पंडालों कर खासियत बता रहे हैं। इस कड़ी में जानते हैं आलमबाग के विराटनगर में वीआईपी रोड के किनारे मिश्रा परिवार की ओर से बनाए गए पंडाल के बारे में।

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मिश्रा परिवार की ओर से वर्ष 2001 से गणेशोत्सव का आयोजन कराया जा रहा है। परिवार के प्रो. अनूप ब्रह्मजीत मिश्रा ने बताया कि कोरोना में बप्पा की मूर्ति नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में उन्होंने नारियल की छाल और पेपर से मूर्ति बनाना शुरू कर दिया। पांच साल से पंडाल में नारियल की छाल और पेपर की मूर्ति स्थापित की जा रही है। हर साल मूर्ति की थीम अलग होती है। पिछले साल रामलला के स्वरूप को बप्पा की मूर्ति में दिखाया गया था। इस बार आठ फीट की मूर्ति में बप्पा के गजराज रूप को दिखाया गया है जो अंहकार से दूर रहने का संदेश दे रही है। इसकी लागत तीस हजार है। पूजा में इस्तेमाल की जाने वाली सभी सामग्री घर में बनाई गई है।



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