झांसी। यूजीसी के नए नियम के विरोध में बीजेपी के पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री रवींद्र शुक्ल ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि यूजीसी का घातक जाति संघर्ष को बढ़ाने वाला कानून वापस नहीं हुआ तो वह भाजपा से त्यागपत्र दे देंगे। भाजपा सरकार को विचार कर इस नियम को तत्काल वापस लेना चाहिए।
पूर्व मंत्री ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक के बाद एक तीन पोस्ट की। पहली पोस्ट में लिखा कि यूजीसी के प्रावधानों का खुला विरोध करता हूं। जन-जन के चहेते प्रधानमंत्री से निवेदन करता हूं कि इसे वापस कराएं। 15 वर्ष की आयु से केवल संघ को जी रहा हूं पर धैर्य जवाब दे रहा है। दूसरी पोस्ट में लिखा कि यदि यूजीसी का घातक जाति संघर्ष को बढ़ाने वाला कानून वापस नहीं किया गया तो मैं भाजपा से त्यागपत्र दे दूंगा। तीसरी पोस्ट में लिखा कि एक बार वंदे मातरम का सम्मान बचाने के लिए अपने पद का बलिदान दिया था, अब सनातन समाज को जाति संघर्ष से बचाने के लिए बलिदान देने को तैयार हूं। उनकी ये पोस्ट सोशल मीडिया पर समर्थकों द्वारा जमकर शेयर/वायरल की जाने लगी है।
वहीं, अमर उजाला से बातचीत में पूर्व मंत्री बोले कि यूजीसी का नया नियम जातीय संघर्ष का प्रेरक बनेगा। इससे जातिगत खाई गहरी होगी। महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के परिसर नकारात्मक ऊर्जा से भर जाएंगे। रोज लड़ाई और प्राथमिकी दर्ज होगी। ये सब किस सीमा तक जाएगा, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। एक तरफ कहा जा रहा है कि सारे हिंदू समाज को बचाने के लिए जातिवाद समाप्त होना चाहिए। सरकार की भी जिम्मेदारी है कि जातिगत खाई बढ़े नहीं, बल्कि घटे। इसलिए गहन समीक्षा करके सभी वर्ग को शामिल किया जाना चाहिए। सबका साथ, सबका विकास का तात्पर्य ब्राह्मण, वैश्य, ठाकुर को एकतरफ करके कोई निर्णय लेना और प्रताड़ित करना नहीं है। इसका तात्पर्य है कि सभी के साथ न्याय हो। बोले कि ये नियम वापस नहीं लिया गया तो भाजपा से त्यागपत्र दे दूंगा। इस मामले में जन आक्रोश साफ दिख रहा है। फिर वह लोगों के साथ खड़े होकर इसका विरोध करेंगे।
बेसिक स्कूलों में वंदे मातरम गीत अनिवार्य करने पर गंवानी पड़ी थी कुर्सी
कल्याण सिंह सरकार में रवींद्र शुक्ल बेसिक शिक्षा मंत्री थे। सत्ता में रहने के दौरान वंदे मातरम गीत को उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में अनिवार्य किए जाने पर 27 साल पहले उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। केंद्र की साझा सरकार में शामिल दलों के दबाव में प्रदेश सरकार को यह आदेश भी वापस लेना पड़ा था।
