Former minister Chaudhary Bashir could not even save his bail in Firazabad lost in NOTA also

पूर्व मंत्री चौधरी बशीर
– फोटो : अमर उजाला

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भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ईवीएम में यह नोटा का विकल्प दिया है। यानी अगर कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं है तो मतदाता नोटा पर वोट कर सकता है। 2019 के लोकसभा चुनाव में नोटा को इतने वोट मिले कि उसने पूर्व मंत्री चौधरी बशीर एवं निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरे राजवीर को हराने का काम किया था। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में यह संख्या पिछले चुनाव के सापेक्ष कम रही।

लोकसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार से प्रारंभ हो गई। सपा, बसपा की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा कर दी गई। लेकिन भाजपा ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इस चुनाव में निर्दलीय सहित छोटे दलों के प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भले ही मुकाबला भाजपा के डाॅ. चंद्रसेन जादौन, सपा के अक्षय यादव, प्रसपा नेता शिवपाल सिंह यादव एवं भारती किसान परिवर्तन पार्टी के उपेंद्र सिंह राजपूत से तो नोटा हार गया था। शिवपाल यादव को 91869 मत मिले थे। जबकि उपेंद्र सिंह 9503 मत पाकर चौथे स्थान पर रहे थे।

 



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