Fraud in AKTU:

एकेटीयू में हुई बैंकों की बैठक में शामिल होने के बाद बाहर आता जालसाज अनुराग श्रीवास्तव (फाइल फोटो)
– फोटो : amar ujala

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डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के 120 करोड़ रुपये पार करने के मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। बैंक मैनेजर बन शातिर ने एफडी दर संबंध के जो दस्तावेज एकेटीयू में मीटिंग में दिए थे, वह सही थे। उस दस्तावेज पर दस्तखत बैंक के रीजिनल मैनेजर (आरएम) के थे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि शातिर की बैंक में पैठ किस कदर थी। बैंक के कई अफसरों व कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है।

ठगी में पुलिस छह आरोपियों को जेल भेज चुकी है। इसमें देवेंद्र प्रसाद जोशी, उदय पटेल, राजेश बाबू, गिरीश चंद्र, शैलेश कुमार रघुवंशी, दस्तगीर आलम और कृष्णकांत शामिल है। मुख्य आरोपी अनुराग श्रीवास्तव और उसका साथी कपिल पुलिस की गिरफ्त दूर है। प्रकरण में एक अहम तथ्य सामने आया। दरअसल पांच जून को एकेटीयू परिसर में एफडी संबंधी प्रक्रिया हुई थी। इसमें आठ बैंकों ने हिस्सा लिया था। उसी में आरोपी अनुराग श्रीवास्तव खुद को यूनियन बैंक की बापू भवन शाखा का मैनेजर अनुज कुमार सक्सेना बता शामिल हुआ था। एफडी पर ब्याज दर सबसे अधिक उसी के दस्तावेजों में दर्ज थी। इसलिए एकेटीयू ने 120 करोड़ की एफडी कराने की डील उससे की थी। एकेटीयू के सूत्रों के मुताबिक एफडी दर संबंधी दस्तावेज जो अनुराग ने दिये थे, वह सही थे। बैंक के रीजनल मैनेजर विजय द्विवेदी के उस पर हस्ताक्षर हैं।

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वहीं, बैंक का दस्तावेज हासिल कर लेना साबित करता है कि अनुराग की बैंक में गहरी पैठ है। कोई ऐसा शख्स है, जो उसकी मदद करता रहा। जानकारी देने के साथ ही दस्तावेज भी उपलब्ध कराया। जानकारी के मुताबिक जेल भेजा जा चुका आरोपी शैलेश कुमार रघुवंशी पहले से ही मैनेजर के संपर्क में रहा है। अंदेशा है कि कुछ और कर्मचारी व अधिकारी उसके सीधे संपर्क में रहे हैं। जिसका फायदा उठाकर ठगी को अंजाम दिया गया।

महज चार दिन में ठगी को दे दिया अंजाम

ठगी की साजिश करीब एक महीने पहले रची थी। तीन जून को शैलेश ने बैंक मैनेजर को कॉल कर एफडी संबंधी जानकारी मांगी। उसी शाम वह बैंक भी गया। चार जून को एकेटीयू नाम से फर्जी खाता खुलवाया। पांच जून को अनुराग फर्जी बैंक मैनेजर बन एकेटीयू में हुई बैठक में शामिल हुआ। इसके अगले दिन एकेटीयू की तरफ से रकम भेजी गई। कुछ ही घंटे बाद ये रकम एकेटीयू के फर्जी खाते में ट्रांसफर कर ली गई और वहां से ट्रस्ट के खाते में।



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