उत्तर प्रदेश मेडिकल कौंसिल ने सूचना के अधिकार के तहत 24 जुलाई 2025 को जानकारी दी है कि पंजीयन संख्या 98616 पर डा. यूसुफ पुत्र मीरहसन का नाम दर्ज है। जबकि गौतम बुद्ध नगर के जेवर टप्पल रोड स्थित निजी अस्पताल ने सीएमओ कार्यालय में दिए गए दस्तावेज में डा. नीतेश कुमार का पंजीयन संख्या 98616 लिखा है। सीएमओ कार्यलाय ने इसी नंबर पर अस्पताल का पंजीयन भी पांच साल के लिए कर दिया है। यह केस तो उदाहरण मात्र है।

पूरे प्रदेश में डॉक्टरों की डिग्री पंजीयन से लेकर अस्पताल संचालन के पंजीयन में बड़े पैमाने पर खेल चल रहा है। इसमें किसी न किसी रूप में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की मिलीभगत है। यह खेल चित्रकूट और सिद्धार्थनगर जैसे छोटे जिलों में ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटे जिलों में धड़ल्ले से चल रहा है। अस्पतालों के पंजीयन के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय (सीएमओ) में डॉक्टर के नाम के साथ ही उसके सभी दस्तावेज देने होते हैं। इसमें उत्तर प्रदेश मेडिकल कौंसिल का प्रमाण पत्र भी अनिवार्य है। तमाम अस्पताल दस्तावेजों में हेरफेर करके पंजीयन करा रहे हैं। इसमें किसी न किसी रूप में सीएमओ कार्यालय की भूमिका संदिग्ध है। स्वास्थ्य महानिदेशालय में भी इस तरह की शिकायतें लगातार आ रही हैं। इन शिकायतों पर सीएमओ कार्यालय से रिपोर्ट मांगी जाती है। ऐसे में आनन- फानन में अस्पताल का पंजीयन निरस्त करके कार्रवाई करने की रिपोर्ट भेज दी जाती है।