Friendship started from tenth class, reached the stage of marriage like this

प्रमेन्द्र पाल सिंह पत्नी रेशू हरकुट के साथ
– फोटो : स्वयं

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प्यार दो दिलों का मिलन ही नहीं है इसके लिए त्याग और समर्पण भी जरूरी है। यह सात जन्मों का अटूट बंधन भी है। कभी-कभी जिंदगी की पहली मुलाकात ऐसी हो जाती है कि लोग बचपन के प्यार में अपने जीवन में अपना लेते हैं। ऐसी ही दिलचस्प कहानी है खैर रोड निवासी प्रमेंद्र पाल सिंह गुड्डू व रेशू हरकुट की। 

सरनेम से प्रेम कहानी की ताकत को समझा जा सकता है। प्रमेंद्र-रेशु बताते हैं कि दोनों की दोस्ती बचपन से थी। कक्षा दसवीं से शुरू हुई यह दोस्ती कब प्यार में बदल गई पता ही नहीं चला। जो वक्त के साथ लगातार गहराती जा रही थी। इस बीच प्रमेंद्र को पढ़ाई के लिए दिल्ली तो रेशू को वनस्थली पीठ, कोटा राजस्थान जाना पड़ा, लेकिन दोनों का प्यार कम नहीं हुआ। जब भी वक्त मिलता दोनों घंटों फोन के जरिए बातचीत करते। पढ़ाई पूरी हुई तो अहसास हुआ कि जीवन में कुछ कमी सी हो गई है। 

चूंकि दोनों अलग-अलग बिरादरी से नाता रखते थे। ऐसे में परिजनों ने जाति बंधन की दीवार खड़ी कर दी, लेकिन प्यार की ताकत के आगे यह दीवार ढह गईं और दिसंबर 2016 में उनकी दोनों परिवारों के परिजनों की रजामंदी से शादी हो गई। प्रेम, त्याग और समर्पण है इसके चलते दोनों के बीच कभी मनमुटाव नहीं हुआ। शादी को कब आठ साल हो गए पता ही नहीं चला। आज दो बेटियां उनके जीवन में आ चुकी हैं। दोनों परिवारों से भरपूर आशीर्वाद मिल रहा है।



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