{“_id”:”66bd1f92bf3d4464470cb9b5″,”slug”:”gajendra-singh-kailor-had-freed-the-british-rule-orai-news-c-224-1-ori1001-118500-2024-08-15″,”type”:”story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”Jalaun News: गजेंद्र सिंह कैलोर ने अंग्रेजी हुकूमत के छुड़ा दिए थे छक्के”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और राज्य”,”slug”:”city-and-states”}}

माधौगढ़। स्वतंत्रता सेनानी गजेंद्र सिंह कैलोर को तहसीलदार का बस्ता जलाने में आठ वर्ष की सजा सुनाई गई। वही अंग्रेजी शासन की संचार व्यवस्था ठप्प करने के लिए टेलीफोन के तार काटने में वह कई बार जेल भेजे गए। जेल से वापस आने पर अंग्रेजी बोलना व समझना सीखा। जिससे अंग्रेजी व्यवस्था के आदेशों का अर्थ निकालकर आम जनता को समझा सके। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गजेंद्र सिंह कैलोर का जन्म 9 अप्रैल 1913 को साधारण किसान परिवार में हुआ। पत्नी कमला देवी की प्रेरणा से 1922 में माधौगढ़ स्थित गढ़ी में किराए पर जगह लेकर नेहरू औद्योगिक हाईस्कूल की स्थापना की। गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने लगे। सन 1937 में स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए, फिर पीछे मुड़कर नही देखा। 1942 में तहसीलदार का बस्ता जलाने में आठ वर्ष की सजा सुनाई गई। अपील पर पांच वर्ष की सजा माफ कर दी गई। अंग्रेजों के खिलाफ मुहिम में सीटी की सांकेतिक भाषा बनाई । कार्यकर्ताओं , सहयोगियों को गुप्त संदेश सीटी बजाकर भेज देते थे। गढ़ी स्थित स्कूल में लगे घंटा लगातार 50 बार बजाने पर लोगों को आगाह किया जाता । उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में विशेष ध्यान दिया। अनेक संस्थानों की स्थापना की। बुंदेलखंड इंटर कॉलेज बिरिया की स्थापना की , जो बाद में माधौगढ़ स्थानान्तरित हुआ। समर सिंह इंटर कॉलेज रामपुरा, कर्नल ईश्वरी सिंह शेखपुरा की स्थापना की। स्वतंत्रता सेनानी रहे भूरे सिंह,वहादुर सिंह अटागांव, मलखान सिंह डिकौली,वृजपाल सिंह सिरसा दो गढ़ी के साथ अंग्रेजी शासन के खिलाफ डटे रहे। उन्होंने स्वास्थ्य वृद्धि हेतु अनेक पुस्तकें लिखी। सेनानी के पौत्र अध्यापक अखिलेश सिंह का कहना हैं कि बाबा युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत रहे। उनकी स्मृति में उनकी सभी पुस्तकों को एकत्र कर गजेन्द्र पुस्तकालय का निर्माण कराया जाएगा, जिसमें देश विदेश की 5000 पुस्तकों का संकलन किया जाएगा। सेनानी ने 31 अगस्त 1991 को अतिंम सांस ली।
