अमर उजाला ब्यूरो

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झांसी। करोड़ों रुपये के नजूल भूमि घोटाले का मामला सामने आने से खलबली मची है। गरियागांव, भगवंतपुरा एवं बिजौली की कुल 17 एकड़ जमीन में भी आराजी की अदला-बदली का खेल हुआ है।

फर्जीवाड़े की शिकायत मिलने पर निगम प्रशासन ने इन आराजी की पड़ताल में जुटा है। नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम को पैमाइश के लिए लगाया गया है। निगम अफसरों का कहना है कि पैमाइश होने के बाद ही यहां की स्थिति साफ हो सकेगी।

नगर निगम की गोविंद चौराहे के पास स्थित नजूल भूमि में फर्जीवाड़े का कुछ दिन पहले ही भंडाफोड़ हुआ है। निगम प्रशासन ने इस मामले में चार आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। इस मामले के उजागर होने के बाद अब दूसरे जगहों के मामले भी सामने आने लगे। नगर निगम की गरियागांव, भगवंतपुरा एवं बिजौली की जमीन में गड़बड़ी की सबसे अधिक शिकायत सामने आ रही है। भगवंतपुरा में (आराजी संख्या 813) चार एकड़, बिजौली (आराजी संख्या 1587) में तीन एकड़ एवं गरियागांव (आराजी संख्या 1728) में दस एकड़ जमीन पर विवाद सामने आया है। निगम अफसरों को अंदेशा है यहां आराजी संख्या में हेरफेर करके सरकारी जमीन के साथ फर्जीवाड़ा किया गया है। इन आराजी में नगर निगम की जमीन है। अब इसकी जमीन की पड़ताल के लिए नगर निगम एवं राजस्व की संयुक्त टीम लगाई गई है। सहायक नगर आयुक्त अब्दुल कलाम का कहना है कि संयुक्त टीम इसका पैमाइश करेगी।

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संपत्ति विभाग के कर्मचारियों तक पहुंची आंच

करोड़ों रुपये की नजूल जमीन घोटाले के खुलासे के बाद नगर निगम के संपत्ति विभाग के कर्मचारियों की भूमिका तलाशी जा रही है। माना जा रहा बिना निगम कर्मचारी की मिलीभगत से इतना बड़ा घपला संभव नहीं। छानबीन के दौरान कई फाइलें ऐसी पकड़ी गईं जिनमें नगर निगम के रिकॉर्ड में सरकारी जमीन दर्ज होने के बावजूद जमीन कारोबारियों के पक्ष में रिपोर्ट लगाकर एनओसी जारी कर दी गई। इन कर्मचारियों की पड़ताल चल रही है। जल्द ही दोषी मिलने वाले कर्मचारियों पर गाज गिरने की संभावना जताई जा रही है।



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