
Ganga Dussehra : चार शुभ योग में मनाया गया गंगा दशहरा
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उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी यानी शुक्रवार को गंगा दशहरा मनाया गया। इस बार गंगा दशहरा पर चार शुभ योग का निर्माण हुआ। इससे इस पर्व का महत्व कई गुना अधिक है। पूजा-पाठ, दान-पुण्य के कार्य होंगे। जिले से गुजरने वाली गंग नहरों पर मेले का आयोजन हुआ।
ज्योतिषाचार्य रामानंद ने बताया कि गंगा दशहरा के दिन हस्त नक्षत्र सुबह 11:13 बजे तक रहेगा। इसके बाद चित्रा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। पंचांगों के अनुसार इस साल गंगा दशहरा के दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। इस विशेष दिन पर सर्वार्थ सिद्धि, रवि, वरियान और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। इन्हें पूजा-पाठ के लिए उत्तम माना जा रहा है। रविवार को सुबह से ही बड़ी संख्या में जिले के लोग गंगा स्नान के लिए फर्रुखाबाद के लिए रवाना हो गए।
यह है मान्यता
ऐसी मान्यता है कि देव नदी गंगा इसी दिन स्वर्ग से धरती पर आईं थीं। उस दिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि थी। हर साल इस तिथि पर गंगा दशमी का पर्व मनाया जाता है। इसे गंगा दशहरा भी कहते हैं। आचार्य रामानंदन बताते हैं कि स्कंद पुराण में गंगा दशहरा का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। कहते हैं कि गंगा के दर्शन मात्र से पापों से मुक्ति मिल जाती है।
यह करें
- गंगा दशहरा पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है।
- गंगा नदी में स्नान करें। यदि नहीं जा सकते तो घर में ही बाल्टी के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- दान का विशेष महत्व है। इस दिन पानी से भरा हुआ घड़ा, सुराही या कलश का दान करें।
- रसदार फल जैसे तरबूज, खरबूजा, नारियल आदि का दान करना चाहिए।
गंगा दशहरा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार 16 जून को गंगा दशहरे पर दशमी तिथि सुबह 2.32 बजे से शुरू होकर 17 जून को सुबह 4.43 तक रहेगी। हस्त नक्षत्र पूर्वाह्न 11.13 तक रहेगा। आचार्य रामानंदन के अनुसार इस साल गंगा दशहरा पर कई शुभ योग बन रहे हैं। सुबह 5:23 बजे से लेकर 11:13 बजे तक अमृत सिद्धि योग है। इसके साथ-साथ वरीयान योग रात 9:03 मिनट तक है। इसके अलावा रवि योग का भी बन रहा है जो दिनभर रहेगा। ये तीनों ही योग पूजा-पाठ और दान पुण्य के लिए उत्तम होते हैं।
गंगा दशहरा की पूजा विधि
- गंगा दशहरा पर ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान करें। इसके बाद साफ वस्त्रों का धारण करके सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
- इस शुभ दिन पर गंगा मां के साथ-साथ शिव जी की पूजा करने का भी विधान है। इस दौरान गंगा स्त्रोत का पाठ करने से व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति होती है। पूजा के बाद आप जरूरतमंद लोगों को दान कर सकते हैं।
