लखनऊ। ट्रांसपोर्टनगर में सड़कों और नालियों की ही दुर्दशा नहीं है, बल्कि जगह-जगह फैली गंदगी और कूड़े के ढेरों ने इसके उपेक्षित होने पर मुहर लगा दी है। सोमवार को यहां के हालात देखने पहुंची अमर उजाला की टीम को ट्रांसपोर्टनगर मेट्रो स्टेशन से क्षेत्र में प्रवेश करते हर तरफ गंदगी, कीचड़ और कूड़े के ढेर नजर आए। जरा सी चूक होने पर यहां कीचड़ और गंदगी के बीच फंसना तय था। दो किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र को देखकर लगा कि करोड़ों का राजस्व देकर सरकारी खजाना भरने वाला इलाका वाकई सौतेलेपन का शिकार है।क्षेत्र की साफ-सफाई भी बुनियादी सुविधाओं में से एक है। ट्रांसपोर्टनगर के कारोबारियों को यह भी मयस्सर नहीं है। यहां के अधिकतर ट्रांसपोर्टर और वेयर हाउस मालिक शहर के पॉश इलाकों, बड़े अपार्टमेंट में रहते हैं। इतनी सुख-सुविधाओं के बीच रहने वाला कारोबारी किस हालात में यहां काम कर रहा है, यह भी चौंकाने वाला है। शायद इन्हीं वजहों से लखनऊ स्वच्छता की रेस में बहुत पीछे रह जाता है।
अफसर घूमकर देखते क्यों नहीं
कारोबारी दिलमीत सेठी के मुताबिक, नगर निगम ने एसोसिएशन को 90 सफाई कर्मियों की जरूरत इस क्षेत्र के लिए बताई है। 20 नियुक्त हैं, वो भी कागजों पर। बताने की जरूरत ही नहीं, कोई भी अफसर आए और पूरे इलाके में घूमकर देख ले कि यहां सफाई होती है या नहीं।
बड़ा सवाल :
एक तरफ उत्तर प्रदेश वेयर हाउस और लॉजिस्टिक पार्क योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में पहले से ही वेयर हाउस के लिए बसाया गया ये क्षेत्र सौतेलेपन का दंश झेल रहा है। सवाल ये है कि छोटी-छोटी सुविधाओं को तरसते इस क्षेत्र पर कोई मेहरबान होगा या नहीं।
नगर निगम की सफाई
हमने अभी एक दिन पहले ही 60 पेज की फीडबैक बुकलेट जारी की है। यह सभी सफाई कर्मियों को दी जा रही है। इसमें उन्हें क्षेत्र के दो लोगों का फीडबैक मोबाइल नंबर सहित भरना होगा। क्रॉस चेक करने के लिए इन नंबरों पर फोन करके जांच की जाएगी। हमारे निर्देशों का फील्ड में कितना पालन हो रहा है, इसे चेक करने के लिए सिस्टम विकसित किया जा रहा है। मुझे यहां आए 15 दिन ही हुए हैं। हम इस मामले को देखेंगे।
-प्रवीण श्रीवास्तव, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम
