
बालकृष्ण चौहान
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मऊ की घोसी संसदीय सीट से प्रत्याशी बनाए गए बालकृष्ण चौहान कभी बसपा का बड़ा चेहरा हुआ करते थे। 1999 में वह पहली बार घोसी लोकसभा सीट से सांसद बने थे, मगर 2004 में सपा के चंद्रदेव प्रसाद राजभर से चुनाव हार गए ।
2009 में उन्हें बसपा से टिकट मिलने की चर्चा थी, मगर उनकी जगह दारा सिंह चौहान को टिकट मिल गया। 2012 में वह सपा में शामिल हो गए। 2014 लोकसभा चुनाव में सपा से टिकट मिलना था, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने 2018 में सपा की सदस्यता छोड़कर वापस बसपा का दामन थाम लिया। बाद में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली।
2019 में वह कांग्रेस के टिकट पर लड़े ओर चौथे स्थान पर रहे। चार अप्रैल को उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बसपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। अब पार्टी ने उन्हें तीसरी बार टिकट दिया है।
