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तालबेहट में करीब 297 एकड़ में किसान कर रहे खेती
प्रति एकड़ 1.50 लाख की लागत और बिक्री पांच लाख
अजय उपाध्याय
तालबेहट (ललितपुर)। बुंदेलखंड की पथरीली और कंकरीली माटी में किसानों ने अदरक, अरबी और रतालू की खेती कर जनपद का नाम रोशन किया है। तालबेहट की माटी में पैदा हो रही अरबी और रतालू की डिमांड देश की मंडियों के अलावा अरब देशों तक में है। किसानों का कहना है कि कुछ वर्षों से प्राकृतिक आपदा के चलते अदरक की खेती का क्षेत्रफल तो नहीं बढ़ा लेकिन पैदावार का ग्राफ भी कम नहीं हुआ। अरबी और रतालू की पैदावार बढ़ी है।
जनपद में कुदरत की मार से दलहनी और तिलहनी फसलों के नुकसान से लगातार परेशान तालबेहट तहसील क्षेत्र के किसानों ने अदरक, अरबी और रतालू की खेती शुरू की जिससे उन्हें लागत के सापेक्ष मुनाफा अधिक मिला तो आसपास इलाकों के किसान भी इसके लिए प्रेरित होने लगे।
आज करीब 297 एकड़ भूमि पर किसान अदरक, अरबी और रतालू की खेती कर रहे हैं। कड़ेसराकला गांव के निवासी किसान मोहन कुशवाहा ने बताया कि एक एकड़ खेत में 3.5 क्विंटल अदरक, 45 किलो अरबी और 40 किलो रतालू बोया जाता है। उन्होंने बताया कि तीनों की फसल पर करीब 1.50 लाख की लागत आती है। सब कुछ ठीक ठाक रहा तो करीब पांच लाख रुपये की फसल बिक जाती है। इससे किसान को खासा मुनाफा होता।
कई गांवों में प्रमुखता से होती है पैदावार
तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम खांदी, बिजरौठा, कड़ेसराकलां, पवा, पूराकलां, गेवरा गुंदेरा, उगरपुर, भुचेरा, करेंगा सहित अधिकांश गांवों के किसान इस उपज को प्रमुखता से बोते हैं।
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नवरात्र के बाद से अदरक, अरबी और रतालू की आवक शुरू हो जाती है। यहां का अदरक मुख्यत: ग्वालियर, आगरा, कानपुर, अरबी दिल्ली, जयपुर व करेली राजस्थान और रतालू अहमदाबाद, सूरत भेजा जाता है। उसने बताया कि अरबी और रतालू कई देशों में सप्लाई किया जाता है। – रामकुमार शर्मा,ग्राम चंद्रापुर जनपद ललितपुर
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क्षेत्र में लगभग 212 एकड़ में अदरक और 85 एकड़ में अरबी और रतालू की पैदाबार की जा रही है। तीनों फसलें एक साथ तैयार होती हैं। अदरक के साथ अरबी और रतालू एवं मिर्च भी लगा रहे हैं जिससे हमारा लाभ बढ़ जाता है। – सुरेश कुशवाहा, सरखड़ी
