
राम मंदिर अयोध्या।
विस्तार
फैजाबाद जिले से लेकर रेलवे स्टेशन तक के नाम बदल गए, लेकिन चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में अब भी अयोध्या, फैजाबाद के ही नाम से दर्ज है। यूपी में लोकसभा चुनाव का पांचवां चरण अवध पर केंद्रित है और फैजाबाद सहित अवध के ज्यादातर लोकसभा क्षेत्रों में 20 मई को मतदान है। पर, कई राजनीतिक विश्लेषक बेचैन हैं कि राम मंदिर को लेकर जो ज्वार 22 जनवरी को प्राण-प्रतिष्ठा समारोह के आसपास नजर आ रहा था, वह अब नहीं दिख रहा। मतदाता आखिर शांत क्यों हैं? क्या इस मुद्दे का कुछ असर होगा?
हमने यही सवाल अयोध्या में स्वतंत्र पत्रकार डाॅ. चंद्र गोपाल पांडेय से किया। डाॅ. पांडेय कहते हैं, प्राण-प्रतिष्ठा से अब तक करीब 1.5 करोड़ श्रद्धालु राम मंदिर दर्शन कर चुके हैं। ये दर्शनार्थी पूरे देश से आ रहे हैं। जो पहले अयोध्या आए होंगे, उन्हें स्टेशन व एयरपोर्ट से लेकर अयोध्या के गली-कूचे और मंदिर-मंदिर तक बदलाव नजर आता है। यह बताता है कि राम मंदिर का मुद्दा और आकर्षण लोगों के बीच कायम है और चुनाव व सियासत इसके असर से मुक्त रह पाएगा, सोचना बेमानी है।
साकेत महाविद्यालय के पास हमें राकेश यादव मिल गए। वह कहते हैं, महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक और आरक्षण के मुद्दे पर सवाल होने शुरू हुए तो भाजपा बेचैन हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच मई को ही यहां रोड शो करने पहुंच गए। लोगों के भटकते ध्यान को केंद्रित करने और अयोध्या को राष्ट्रीय स्तर पर फिर चर्चा में लाने के लिए पीएम ने बड़ी चतुराई से यह सब किया। वरना, वे अयोध्या 15-18 मई के आसपास आते। पीएम के आने के बाद अयोध्या और राम मंदिर पर चर्चा तेज हो गई। वह कहते हैं, राम सबके हैं, इसलिए सियासत में राम को नहीं लाना चाहिए। हालांकि, मिल्कीपुर कस्बे के पास मिले दलित समाज के राम जियावन कहते हैं, मुख्य लड़ाई तो भाजपा और सपा में ही है। अयोध्या में भाजपा का जीतना जरूरी है, नहीं तो पूरे विश्व में बदनामी होगी।
सीट का समीकरण
- भाजपा के लल्लू सिंह 2019 का चुनाव 5.29 लाख वोट मिलने के बाद भी बमुश्किल 65 हजार वोटों से जीते थे। सपा-बसपा गठबंधन से सपा प्रत्याशी रहे आनंद सेन यादव को 4.63 लाख वोट मिले थे। कांग्रेस के निर्मल खत्री को मिले 53 हजार वोट भी यदि गठबंधन के साथ जोड़ दें तो अंतर बेहद करीबी हो जाता। जबकि, 2014 में लल्लू 2.81 लाख वोटों से चुनाव जीते थे। इस बार राम मंदिर फैक्टर से वह थोड़ा राहत महसूस कर रहे होंगे। लेकिन, निर्मल खत्री और कांग्रेस के मैदान में नहीं होने का लाभ सपा को हो सकता है।
- फैजाबाद सीट पर पासी बिरादरी की संख्या अच्छी है। पासी बिरादरी में भाजपा का अच्छा प्रभाव माना जाता है। सपा ने भाजपा के पासी वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए यादव व मुस्लिम मतदाताओं को अपना कोर वोटबैंक मानकर पासी समाज से कद्दावर विधायक अवधेश प्रसाद को उतार दिया। इससे आनंद सेन परिवार नाराज बताया जाता है।
- सेन परिवार को टिकट न मिलने का नतीजा हुआ कि आनंद सेन के भाई व पूर्व आईपीएस अधिकारी अरविंद सेन भाकपा से मैदान में आ गए हैं। भगवा किले में करीब 33 वर्ष बाद कम्युनिस्ट पार्टी से किसी प्रमुख राजनीतिक घराने का व्यक्ति मैदान में आया है। अरविंद के पिता मित्रसेन यादव सपा और बसपा के अलावा सीपीआई से भी सांसद रहे हैं। मित्रसेन पांच बार विधायक भी रहे हैं।
- टिकरा में मिले अमरदेव प्रजापति कहते हैं कि यादव समाज चर्चा कर रहा है कि यदि अवधेश प्रसाद सांसद हुए तो फैजाबाद की संसदीय सीट से यादवों की राजनीति खत्म हो जाएगी। इसलिए तमाम यादव अरविंद सेन और भाजपा की ओर जा रहे हैं। सपा को यादवों से पहले की तरह सपोर्ट मिलने की संभावना कम है।
- उधर, बसपा ने भाजपा की राह मुश्किल करने के लिए ब्राह्मण समाज के प्रत्याशी सच्चिदानंद पांडेय को उतारा है। पांडेय भाजपा में रहे हैं। वह काडर वोटों के साथ कहीं-कहीं ब्राह्मण वोटों में सेंध लगाते नजर आते हैं।
- सपा की एक चुनौती यह भी है कि जिले से उसके एक विधायक अभय सिंह, भाजपा के पाले में चले गए हैं। अभय की पत्नी सरिता सिंह, उनके कई सहयोगी व अन्य परिजन भाजपा के लिए वोट मांग रहे हैं।
प्रमुख मुद्दे
- भदरसा नगर पंचायत में मिले निषाद समाज के राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि छुट्टा जानवर की समस्या तो है, लेकिन सम्मान निधि मिल रही है। पेंशन भी बढ़ गई है। मंदिर भी बन गया।
- खजुरहट के पास मिले अमरनाथ गुप्ता ने बताया कि मोदी-योगी सभा में आते हैं, तो देवी-देवता व जनता को प्रणाम कर बात शुरू करते हैं। सपा व कांग्रेस वाले टाटा-गुडबॉय करते हैं। इधर, रामजी का जोर है।
- ककरही बाजार में मिले बहादुर यादव कहते हैं कि सपा आएगी तो गुंडई बढ़ेगी। राशन व आवास मिला है। मंदिर बन गया है। हिंदुओं का सिर ऊंचा हुआ है। हम इसी काम पर वोट देंगे।
- बाला सराय में राजमिस्त्री राम भवन कहते हैं कि महंगाई बहुत है। सिलिंडर का दाम बहुत बढ़ गया है। लेकिन, वोट राम मंदिर पर जाएगा। यह भी कहते हैं कि अवधेश प्रसाद तगड़ी टक्कर दे रहे हैं।
- बहादुरपुर मसौधा में मिले केशव राम पांडेय कहते हैं कि सांसद कोई काम नहीं करते। भाजपा के नाम पर जीतते हैं। दरियाबाद में मिले दिनेश कुमार यादव कहते हैं कि यादव वोट भी थोड़ा बंट रहा है। इधर के ज्यादातर पासी भाजपा के साथ हैं। देखते रहिए आनंद सेन का पूरा परिवार सपा के साथ आ जाएगा।
इस समर के योद्धा
- लल्लू सिंह, भाजपा : उम्र-69 साल, शिक्षा-एमए, एलएलबी। अयोध्या विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहे हैं। 2014 और 2019 में फैजाबाद से सांसद बने। उत्तर प्रदेश सरकार में एक बार राज्यमंत्री रह चुके हैं।
- अवधेश प्रसाद, सपा : उम्र-79 साल, शिक्षा-एमए, एलएलबी। सोहावल और मिल्कीपुर विधानसभा सीट से 9 बार के विधायक हैं। उत्तर प्रदेश सरकार में 6 बार कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।
- सच्चिदानंद पांडेय, बसपा : उम्र-33 साल, शिक्षा-बीए। आजमगढ़ के रहने वाले हैं। राजनीति की शुरुआत भाजपा से की। अंबेडकरनगर लोकसभा सीट से टिकट मांग रहे थे। चुनाव से पहले बसपा में शामिल हुए हैं।
