सिविल जज सीनियर डिवीजन (फास्ट ट्रैक) भावना भारती की अदालत से ज्ञानवापी के वर्ष 1991 के पुराने मुकदमे के वादी रहे स्वर्गीय हरिहर पांडेय की बेटियों को शनिवार को राहत नहीं मिल सकी। अदालत ने मामले के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी को पद और मुकदमे से हटाने के प्रार्थना पत्र के पक्ष में पहले से पारित आदेश में संशोधन के लिए दाखिल प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि पुराने आदेश में कोई विधिक दोष नहीं है। वाद मित्र एक निजी ट्रस्ट के पदाधिकारी हैं जिनका काशी विश्वनाथ मंदिर से कोई लेना-देना नहीं है।

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अदालत ने कहा कि काशी विश्वनाथ मंदिर के अधिग्रहण के पश्चात प्रदेश सरकार ने काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट का गठन किया था। निजी ट्रस्ट से मंदिर का कोई प्रतिनिधि नहीं होता है। हरिहर पांडेय की मृत्यु के बाद हिंदू जनमानस का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई व्यक्ति नहीं है। अदालत ने मामले की सुनवाई की तिथि 11 सितंबर तय कर दी। अगली तिथि पर बेटियों को पक्षकार बनाने से संबंधित अर्जी पर सुनवाई होगी।

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दरअसल, 11 जुलाई को अदालत ने बेटियों की ओर दाखिल अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद ही संशोधित प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। इसमें कहा गया था कि पक्षकार बनाने से संबंधित अर्जी पर सुनवाई हो रही थी। इसी बीच एक और अर्जी दी गई थी जो वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने संबंधित थी। पक्षकार बनने संबंधित अर्जी के अनुरूप ही दूसरी अर्जी दी गई थी। अदालत ने सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित कर लिया था। अदालत ने शनिवार को आदेश पारित किया है।  



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