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हाथरस साकार हरि सत्संग का हादसे से पहले का दृश्य – फोटो : संवाद
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सिकंदराराऊ में गतवर्ष दो जुलाई को भोले बाबा के सत्संग हादसे में भगदड़ के दौरान 121 मौतों के मामले में हर स्तर पर अफसरों की लापरवाही सामने आई थी। अनुमति 20 हजार की दी गई थी, सत्संग में ढाई लाख की भीड़ जुटी थीं, व्यवस्था के लिए मात्र 69 पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। एसएचओ से लेकर एलआईयू तक ने अधिक भीड़ जुटने का अंदेशा जताया था। लेकिन इन रिपोर्ट को अफसरों ने देखा तक नहीं था।
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अब हाईकोर्ट ने भी हाथरस के डीएम और एसपी को हलफनामे के साथ तलब किया है और पूछा है कि क्यों न हादसे और बदइंतजामी के लिए उनकी जिम्मेदारी तय की जाए। हादसे की एसआईटी जांच और न्यायिक आयोग की जांच में भी माना गया था कि भीड़ को देखते हुए पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए थे। भीड़ को लेकर भी अलग-अलग अनुमान लगाए गए थे। अनुमति 20 हजार लोगों के लिए दी गई थी। एलआईयू ने अपनी रिपोर्ट में 50 हजार से अधिक लोगों के पहुंचने की बात कही थी। इंस्पेक्टर सिकंदराराऊ ने भी 29 जून एक पत्र पुलिस अधीक्षक को लिखा था, जिसमें एक लाख से अधिक लोगों की भीड़ जुटने की आशंका जताई थी और उसी के अनुरूप पुलिस बल उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था।
इसके बाद भी एक एसएचओ, चार इंस्पेक्टर, छह दरोगा, दो महिला दरोगा,चार ट्रैफिक पुलिस कर्मी और डेढ़ सेक्सन पीएसी सहित कुल 69 पुलिस कर्मी लगाए गए थे। उस समय अमर उजाला के साथ बातचीत में पूर्वी डीजीपी अरविंद कुमार जैन ने भी कहा था कि भीड़ को देखते हुए 600 से 700 पुलिस कर्मी लगाए जाने चाहिए थे। इस मामले में शुरू से ही पुलिस व्यवस्था पर्याप्त न होने को लेकर सवाल उठ रहे थे। यहां तक कि पुलिस प्रशासन ने अत्याधिक भीड़ होने का अनुमान भी सही तरीके से नहीं लगाया और न ही अफसरों ने पर्यवेक्षण किया। हादसे वाले दिन भी सुबह से ही भीड़ जुटती रही, इसके बाद भी गंभीरता नहीं दिखाई।