
खोदाई के कार्य को बंद करने की ग्रामीणों से बात करती प्रशासन की टीम
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हाथरस के मुरसान स्थित कलेक्ट्रेट के निकट निर्माणाधीन न्यायालय परिसर में एक बकरी पिछले 13 दिनों से बोरिंग में फंसी हुई थी। 10 दिसंबर को बकरी की आवाज आनी बंद होने के बाद प्रशासन ने जिंदा या मृत के निर्णय से पहले ही खोदाई बंद करा दी।
ग्रामीणों ने 8 दिसंबर को मोबाइल से वीडियो बनाते हुए मोबाइल को नलकूप के बोरिंग में डाला था। जिससे पता चला था कि बकरी जिंदा थी। वह चारा पानी भी ले रही थी। 9 दिसंबर को भी नलकूप के बोरिंग में फंसी बकरी को चारा पानी दिया गया था। लेकिन 10 दिसंबर को नलकूप के बोरिंग में बकरी दिखाई नहीं दी है और न ही उसकी कोई आवाज आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मिट्टी की खोदाई करते समय बकरी मिट्टी में दब गई है। इसे लेकर देर शाम को मिट्टी खोदाई के कार्य को बंद कर दिया गया है।

वहीं, मुकेश पुत्र सौदान सिंह निवासी नगला हीरा सिंह मुरसान ने मिट्टी की खोदाई कर बकरी को निकालने की प्रशासनिक टीम से गुहार लगाई है। उल्लेखनीय है कि मुकेश 28 नवंबर को कलेक्ट्रेट के निकट निर्माणाधीन न्यायालय की जमीन पर बकरी चराने के लिए गया था। इस दौरान उसकी एक बकरी नलकूप की बोरिंग में गिर गई थी।
मामले की कल दिन में जानकारी करुंगा।– रविंद्र, मंडलायुक्त, अलीगढ़
बकरी नलकूप के बोरिंग में जिस जगह पर फंसी हुई थी, उस जगह तक की खोदाई का कार्य हो गया है। लेकिन नीचे मिट्टी ढहने की वजह से बकरी की आवाज आनी बंद हो गई है। उस जगह पर खतरा बढ़ गया है। जिसके कारण खोदाई कार्य को बंद कर दिया गया है। – रविंद्र कुमार, एसडीएम सदर
नलकूप के बोरिंग के पास में करीब 43 फुट खोदाई करा दी गई है, लेकिन बकरी नहीं मिली है। आवाज भी आनी बंद हो गई है।– अबदेश अग्निहोत्री, लेखपाल
