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मथुरा के हवाला कारोबारी नंद किशोर चतुर्वेदी को सीबीआई बीते एक साल से श्रीलंका, दुबई और यूरोपीय देशों में होने का अंदेशा जताती रही, पर वह लखनऊ में छिपा हुआ था। आयकर विभाग की रियल एस्टेट कारोबारियों के ठिकानों पर छापे के दौरान जानकारी मिली है कि नंद किशोर चतुर्वेदी नियमित रूप से पिनटेल और अमरावती ग्रुप के सुल्तानपुर रोड पर चल रहे प्रोजेक्ट्स का निरीक्षण करने जाता था। इससे आशंका जताई जा रही है कि इन प्रोजेक्ट्स में निवेश किए गये सैंकड़ों करोड़ रुपये नंद किशोर के जरिए कंपनियों में भेजे गए थे।
पिनटेल, अमरावती और एक्सेला ग्रुप के ठिकानों पर चार दिन तक पड़े छापों में नंद किशोर चतुर्वेदी का कनेक्शन सामने आने के बाद सीबीआई और ईडी भी सक्रिय हो चुके हैं। दरअसल, सीबीआई और ईडी ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के परिजन श्रीधर पाटणकर के कुछ कंपनियों के साथ हुए संदिग्ध लेन-देन की जांच की थी। इस मामले में नंद किशोर का नाम भी अाया था, जिसके बाद से सीबीआई और ईडी उसे तलाश रहे थे।
पुष्पक बुलियन प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के जरिए नोटबंदी के दौरान की गई हेराफेरी को लेकर बीते जनवरी माह में एक और मुकदमा दर्ज किया है। इसके बाद चतुर्वेदी की तलाश तेज कर दी गई थी। उसके विदेश भागने की आशंका भी जताई जा रही थी।
इस बीच पड़े आयकर छापों में रियल एस्टेट कंपनियों के कर्मचारियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने नंद किशोर के लखनऊ में पनाह लेने के राज खोल दिए। उन्होंने बताया कि पिनटेल ग्रुप के रोहित सहाय और अमरावती ग्रुप के रवि पांडेय के साथ नंदकिशोर सुल्तानपुर रोड के निर्माणाधीन प्रोजेक्ट पर अक्सर आता था।
