
कल्याण सिंह-राजवीर सिंह
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अलीगढ़ में अतरौली के गांव मढ़ौली में जन्मे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे कल्याण सिंह की आज तीसरी पुण्यतिथि है। उनकी पुण्यतिथि पर पिछले वर्ष आयोजित किया गया हिंदू गौरव दिवस इस बार लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित होने जा रहा है। इसमें जिले से पांच हजार लोगों के लखनऊ पहुंचने की तैयारी है।
कल्याण सिंह की दूसरी पुण्यतिथि पर पिछले वर्ष नुमाइश मैदान में हिंदू गौरव दिवस मनाया गया था। उसी दिन यह घोषणा की गई कि यह आयोजन प्रतिवर्ष होगा। उसी क्रम में यह आयोजन इस बार लखनऊ में हो रहा है। मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित पूर्व राज्यपाल व पूर्व सीएम कल्याण सिंह बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए थे। छात्र जीवन में जनसंघ से जुड़कर राजनीति करने लगे। इस समय वह लोगों से मिलने के लिए बाइक व साइकिल से अलीगढ़ आते-जाते थे। जिला मुख्यालय पर आगरा रोड मदार गेट स्थित शंकर धर्मशाला जो अब जर्जर भवन में तब्दील हो चुकी है, वहां जनसंघ का कार्यालय हुआ करता था। वे राजनीतिक ककहरा सीखने मढ़ौली से वहीं आया करते थे।
जीवन में सिर्फ दो चुनाव ही हारे
कल्याण सिंह पहली बार 1962 का चुनाव हारे। इसके बाद 1967 का चुनाव वह जीते। इंदिरा गांधी के लहर में 1980 में वह दोबारा चुनाव हारे। कल्याण सिंह विधायक, स्वास्थ्य मंत्री रहे, दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। बाद में राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल भी रहे। वह दस बार अतरौली से विधायक का चुनाव जीते और बुलंदशहर व एटा से क्रमश: 2004 व 2009 में सांसद निवार्चित हुए। कल्याण सिंह पिछड़े वर्ग के बड़े नेता के तौर पर जाने जाते रहे।
1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा टूटने के बाद कल्याण सिंह हिंदुत्व छवि वाले नेता के रूप में पहचाने गए। अतरौली की जनता ने उन्हें तो हर चुनाव जिताया। साथ ही उनकी विरासत के तौर पर उनकी पुत्रवधू प्रेमलता वर्मा को 2004 व 2007 में विधायक बनाया। वर्तमान में कल्याण सिंह के नाती संदीप सिंह अतरौली से लगातार दो बार से विधायक और वर्तमान में मंत्री हैं। कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह लगातार दो बार उनकी परंपरागत सीट रही एटा लोकसभा से सांसद रहे हैं।
