इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि नाबालिग यौन शोषण की पीड़िता है तो कानून की नजर में उसकी सहमति का कोई महत्व नहीं रह जाता है। ऐसे में आरोपी ने शादी का झूठा वादा करके नाबालिग से संबंध बनाए हैं तो उसे दुष्कर्म की श्रेणी में ही रखा जाएगा। यह टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने कुशीनगर निवासी आरोपी की मुकदमे की कार्यवाही रद्द करने की मांग में दायर अर्जी खारिज कर दी।
कुशीनगर की पीड़िता ने अमरजीत पाल व अन्य के खिलाफ दुष्कर्म व पॉक्सो के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। ट्रायल कोर्ट ने मामले में आरोप पत्र का संज्ञान लेकर समन आदेश जारी किया था। आरोपियों ने मुकदमे की पूरी कार्यवाही को रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में अर्जी दायर की।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि पीड़िता और आरोपी के बीच संबंध पूरी तरह से सहमति पर आधारित थे। पीड़िता वास्तव में बालिग है और उसकी आयु लगभग 20 वर्ष है। मामले में आरोपी को झूठा फंसाया जा रहा है। वयस्क महिला की स्वेच्छा से बनाए गए संबंधों को दुष्कर्म नहीं माना जा सकता।