इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति समीर जैन की अदालत ने 2016 के चर्चित यतीमखाना बेदखली मामले में सपा नेता आजम खां की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने ने न केवल यह मामला, बल्कि आजम से जुड़े अन्य सभी लंबित मामलों को भी अपनी अदालत से रिलीज कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल कोर्ट के अंतिम निर्णय पर लगी रोक अगली तारीख तक प्रभावी रहेगी।

मामला रामपुर शहर कोतवाली क्षेत्र के यतीमखाना बस्ती का है, जिसे 2016 में सपा सरकार के दौरान जबरन खाली कराया गया था। आरोप है कि आजम के इशारे पर सपाइयों ने पुलिस बल के साथ बस्ती को खाली करवाया था। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि कार्यवाही के दौरान घरों में घुसकर मारपीट, छेड़छाड़, रुपये-जेवर और भैंस-बकरियां लूट ले जाने जैसी घटनाओं की अंजाम दिया गया था।

यतीमखाना बेदखली का मामला

इस घटना में 12 अलग-अलग मुकदमे दर्ज हुए थे। आरोपियों में आजम संग सेवानिवृत्त सीओ आले हसन खान, सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष वीरेंद्र गोयल, इस्लाम ठेकेदार आदि नाम शामिल हैं। मामले का ट्रायल रामपुर के एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रहा है। ट्रायल कोर्ट ने 30 मई को आरोपियों की ओर से मामले के मुख्य गवाह वक्फ बोर्ड चेयरमैन जफर अहमद फारूकी को दोबारा बुलाने की मांग। साथ ही कथित बेदखली की वीडियोग्राफी को रिकॉर्ड पर लाने की मांग खारिज कर दी थी।

इसके खिलाफ आजम ने हाईकोर्ट का रुख किया था। दावा किया है कि वीडियो से सिद्ध होगा कि घटनास्थल पर उनकी उपस्थिति नहीं थी और न्यायपूर्ण सुनवाई के लिए यह सबूत बेहद महत्वपूर्ण है। 10 सितंबर को इसी अदालत से आजम को जमानत मिली थी। उसी क्रम में मुकदमा खत्म करने और अन्य राहतों को लेकर आगे की सुनवाई चल रही थी। शुक्रवार को कोर्ट ने आजम के सभी मामलों से खुद को अलग करते हुए मामले को सुनवाई के लिए दूसरी पीठ नामित करने की सिफारिश की है। अब मामला मुख्य न्यायाधीश के आदेश के बाद किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध होगा।



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