इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हनीट्रैप पर रोक न लगाई गई तो सभ्य समाज में रहना मुश्किल हो जाएगा। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने मेरठ जोन में संचालित कथित हनीट्रैप और ब्लैकमेल गिरोह की पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) को जांच करने का निर्देश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुन सक्सेना की खंडपीठ ने फोजिया और अन्य की याचिका दिया है।
बिजनौर निवासी याचियों ने थाना किरातपुर में हनीट्रैप और ब्लैकमेल करने के आरोप में दर्ज एफआईआर को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। मुख्य महिला याची पर आरोप था कि उसने कथित तौर पर एक व्यक्ति को व्हाट्सएप के जरिए अपने जाल में फंसाया और उसे बिजनौर के एक होटल में मिलने के लिए बुलाया। वहां संबंध बनाने के दौरान गुपचुप तरीके से वीडियो क्लिप बना ली गई। इसके बाद उस वीडियो से उस व्यक्ति को ब्लैकमेल किया जाने लगा। इसमें दो पुलिसकर्मी और वार्ड सदस्य के शामिल होने का आरोप सामने आया।
वीडियो बनाने के बाद पीड़ित को डराया-धमकाया गया और उससे पहले 10 लाख रुपये की मांग की गई, जिसे बाद में समझौते के नाम पर 8 लाख रुपये कर दिया गया। भय और शर्म के साए में जी रहे पीड़ित ने अंततः हिम्मत जुटाकर पुलिस में इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ताओं के वकील ने याचिका वापस लेने की प्रार्थना की, तो अदालत ने उसे स्वीकार तो कर लिया, लेकिन अपनी ओर से सख्त निर्देश जारी किया।
प्रदेश भर में हनीट्रैप के गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश
कोर्ट ने आईजी मेरठ को निर्देशित किया है कि वे अपने क्षेत्र के सभी जिला पुलिस प्रमुखों को सतर्क करें ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस तरह का कोई संगठित गिरोह सक्रिय है जो महिलाओं का उपयोग कर निर्दोष लोगों को अपना शिकार बना रहा है। इस आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक (यूपी), अपर मुख्य सचिव (गृह) और अन्य संबंधित अधिकारियों को तत्काल भेजने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पूरे प्रदेश में ऐसे गिरोहों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
