इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पंचायतों का कार्यकाल उनकी पहली बैठक से पांच वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। वर्तमान में प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा है कि समय सीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की स्थिति है या नहीं। अगली सुनवाई तक चुनाव संपन्न कराने का पूरा समयबद्ध कार्यक्रम प्रस्तुत करे।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की खंडपीठ ने अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन की याचिका पर दिया है। प्रयागराज निवासी याची ने निर्धारित समय पर चुनाव कराए जाने की मांग की है। उन्होंने इनपर्सन कोर्ट में दलील दी कि उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों की पहली बैठक 27 मई 2021 को हुई थी, जिसके अनुसार पांच साल का सांविधानिक कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो जाएगा।
निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीखों में बार-बार बदलाव किया है। मतदाता सूची का प्रकाशन अब 15 अप्रैल 2026 तक बढ़ा दिया गया है। यदि मतदाता सूची ही अप्रैल के मध्य तक फाइनल होगी तो परिसीमन, आरक्षण और वास्तविक मतदान की प्रक्रिया 26 मई तक पूरा कर पाना असंभव हो जाएगा। यह सांविधानिक नियमों का उल्लंघन होगा।
