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सांकेतिक तस्वीर – फोटो : ANI
विस्तार
मानव तस्करी के आरोप में फंसे फर्नीचर कारोबारी अंकित आनंद की पत्नी साक्षी और लखनऊ निवासी ससुर सुनील मलिक की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि सभी आरोपियों पर एक सी धाराओं में कार्रवाई नहीं की जा सकती है। सबकी भूमिका अलग-अलग है।
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कारोबारी के ससुर को इस बात का लाभ मिला है कि बच्चा उनके घर या कब्जे से बरामद नहीं हुआ। पुलिस ने जब एक किशोर को बरामद किया था तो उसने आठ साल के चचेरे भाई के लखनऊ में होने की जानकारी दी थी। कारोबारी ने पुलिस को बताया था कि दो बच्चे उसके ससुर और पत्नी ने 60 हजार रुपये में खरीदे हैं। इनमें से एक लखनऊ के आलमबाग स्थित ससुराल में है। इसके बाद पुलिस टीम ने लखनऊ में दबिश दी थी।
हालांकि वह जिस बच्चे की तलाश में गई थी, वह बाद में गुरुग्राम में अपने परिजनाें के पास मिल गया था। इस मामले में गोविंदनगर पुलिस अंकित के अलावा दलाल पप्पू यादव व किशोर के ताऊ शिव महतो और बिहार के मोतीहारी निवासी राहुल ठाकुर को जेल भेज चुकी है। एडीसीपी महेश कुमार ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ जांच चल रही है।
बता दें, 10 दिसंबर को गुरुग्राम निवासी श्रीभगवान नामक व्यक्ति ने पुलिस कंट्रोल रूम में कॉल कर उनके बेटे को बी-ब्लॉक गोविंदनगर निवासी युवक और उसकी पत्नी द्वारा बंधक बनाने की शिकायत की थी। सूचना पर पहुंची गोविंदनगर पुलिस ने कारोबारी अंकित के घर से 12 साल के मासूम को बरामद किया था। आरोप है वे लोग बच्चे को बंधक बनाकर भूखा प्यासा रखते और घर के शौचालय साफ करवाते थे।