पं. दीनदयाल उपाध्याय के जीवन से सीख मिलती है कि जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए: कुलपति

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। हिंदी बहुजन सुखाय की भाषा है। इससे आत्मीयता और आत्मनिर्भता को बोध होता है। राष्ट्रवाद के विकास में हिंदी भाषा का महत्वपूर्ण योगदान है। पं. दीनदयाल उपाध्याय आजीवन हिंदी के समर्थक रहे। यह बात अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत हुई प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरण और पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व शिक्षा मंत्री रवींद्र शुक्ल ने कही।

बीयू के गांधी सभागार में समारोह का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि ने कहा पं. दीनदयाल उपाध्याय आजीवन हिंदी के समर्थक रहे। उन्होंने कानपुर में जीरो क्लब की शुरुआत की। इस क्लब में फेल हुए बच्चों को शिक्षित कर जीवन के प्रति नया उद्देश्य दिया जाता था। कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने कहा पं. दीनदयाल उपाध्याय के जीवन से सीख मिलती है कि जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए। उन्होंने आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार का मंत्र दिया। उनके विचारों पर अनेक शोध हो चुके हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक अखंड प्रताप ने कहा पं. दीनदयाल उपाध्याय के दिए एकात्म मानववाद और अंत्योदय आज भी लोगों को प्रेरणा देती है। छपरा यूनिवर्सिटी के प्रो. सिद्धार्थ शंकर ने कहा पं. दीनदयाल उपाध्याय भारतीय संस्कृति के अग्रदूत थे। राष्ट्र धर्म का परचम बुलंद किया था। वह हमेशा भारतीय शिक्षा और भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पित रहे। अनुपम श्रीवास्तव ने युवाओं से कहा उन्हें स्वावलंबी बनना चाहिए। अपने शौक और जुनून व्यापार में बदल दीजिए। अतिथियों का स्वागत हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. मुन्ना तिवारी ने किया। संचालन डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी व आभार डॉ. विपिन प्रसाद ने ज्ञापित किया। इस दौरान डॉ. प्रेमलता श्रीवास्तव, डॉ. सुनीता वर्मा, डॉ. सुधा दीक्षित, डॉ. शैलेंद्र तिवारी, आकांक्षा, रिचा आदि मौजूद रहे।

0- ये रहा परिणाम

बीयू कर्मियों की प्रतियोगिता में विकास चंद्र शर्मा व अनिल कुमार प्रथम, अवधेश तिवारी व डाॅ. द्युति मालिनी द्वितीय। छात्र-छात्राओं की प्रतियोगिता में पीयूष, नरेश राजपूत, स्वाती बिरथरे प्रथम, मोहिनी, शिवानी, मुकेश प्रजाप व समीक्षा यादव द्वितीय, शिखा कुशवाहा, अभिषेक सिंह, दिव्या चौधरी व कशिश तृतीय रहे।

0- ये कहा वक्ताओं ने

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1. जब देश आजाद हुआ, तब अंग्रेजी के कुछ हिमायतियों ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने का विरोध किया था। हम किसी भाषा का विरोध नहीं करते। भाषाएं ज्यादा से ज्यादा सीखनी चाहिए मगर व्यवहार और कार्यस्थल पर हिंदी का प्रयोग अपनेपन का अहसास कराता है। – रवींद्र शुक्ल, पूर्व शिक्षा मंत्री

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पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद और अंत्योदय आज भी प्रेरणा देती है। अगर युवा इन सिद्धांतों का पालन करेंगे तो भारत जल्द ही विकसित हो जाएगा। वह हमेशा भारतीय शिक्षा और संस्कृति के प्रति समर्पित रहे। जन-जन का कल्याण मूल मंत्र था। – अखंड प्रताप, प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

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वाकई, अमर उजाला अपने नाम के अनुसार ज्ञान का प्रकाश फैलाता है। हिंदी है हम अभियान जन-जन से जुड़ाव रखता है। हिंदी स्पष्ट संदेश देती हैं मगर अंग्रेजी में ऐसा नहीं। प्राण प्रतिष्ठा शब्द का अंग्रेजी डिस्कनरी (शब्दकोश) में कोई शब्द नहीं है। पं. दीनदयाल उपाध्याय ने ही अंत्योदय का संदेश दिया। – प्रो. मुकेश पांडेय, कुलपति बीयू

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हिंदी हैं हम अभियान अभिनव है। इससे भारतीय होने और हिंदी मातृ भाषा बोलने पर गर्व महसूस होता है। पं. दीनदयाल उपाध्याय भारतीय संस्कृति के अग्रदूत थे। राष्ट्र धर्म का परचम बुलंद किया था। हमेशा भारतीय शिक्षा व भारतीय संस्कृति के प्रति समर्पित रहे। – प्रो. सिद्धार्थ शंकर, छपरा यूनिवर्सिटी

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अमर उजाला और बीयू के हिंदी विभाग ने मिलकर ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत विभिन्न प्रतियोगिताएं कराईं। इन प्रतियोगिताओं में न सिर्फ छात्र-छात्राओं बल्कि विवि के कर्मियों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे स्पष्ट है कि हिंदी के प्रति लोगों में काफी लगाव है। – विनय कुमार सिंह, कुलसचिव बीयू

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हिंदी स्वावलंबन की भाषा है। आज भी भारत में यदि व्यवसाय करना है, तो बिना हिंदी के तो संभव नहीं है। इसलिए हर व्यक्ति को स्वावलंबन के साथ हिंदी सीखनी चाहिए। – अनुपम श्रीवास्तव, क्षेत्रीय समन्वयक स्वदेशी जागरण मंच

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अमर उजाला का ‘हिंदी के हम’ अभियान को हिंदी को प्रोत्साहित करने की दिशा में बड़ा कदम है। पंडित दीन दयाल उपाध्याय की जीवन पद्धति संस्कार की पद्धति है और हिंदी भी संस्कार की भाषा है। – प्रो. मुन्ना तिवारी, विभागाध्यक्ष हिंदी विभाग बीयू



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