होलिका दहन की तिथि पर लोगों में भ्रम की स्थिति है। 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि सोमवार 2 मार्च को सायं 5:57 बजे समाप्त होगी, इसके बाद पूर्णिमा तिथि का आरंभ प्रदोष काल में होगा। शास्त्रसम्मत निर्णय के अनुसार 2 मार्च को शाम 6:15 से रात 8:47 बजे तक प्रदोष काल में होलिका दहन करना शुभ और श्रेष्ठ रहेगा।
पंडित सुभाष शास्त्री ने बताया कि 3 मार्च को पूर्णिमा तिथि प्रदोष काल से पूर्व ही समाप्त हो रही है। उस दिन चंद्रग्रहण भी निर्धारित है। 3 मार्च को चंद्रग्रहण का सूतक प्रातः 6:20 बजे से प्रारंभ होगा। ग्रहण का स्पर्श दोपहर 3:20 बजे, जबकि सायं 6:47 बजे मोक्ष होगा। सूतक काल में मंदिरों के पट बंद रहेंगे और पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श, भोजन बनाना व ग्रहण करना वर्जित रहेगा। बालक, वृद्ध और रोगग्रस्त व्यक्तियों के लिए शास्त्रों में नियमों में शिथिलता का प्रावधान है।