Homecoming on Diwali: Space in trains is over, waiting is more than four hundred, emergency quota will also b

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– फोटो : Amar Ujala

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 ट्रेनों में जगह नहीं होने के बाद भी रेलवे टिकट बेच रहा है। इससे मुंबई रूट की ट्रेनों में वेटिंग 400 तक पहुंच जाती है, दिल्ली रूट की गाड़ियों में भी आंकड़ा 250 के पार चला जाता है। वेटिंग का कोटा बढाए जाने से यात्रियों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक तो उन्हें कन्फर्म टिकट नहीं मिलता, वहीं वेटिंग में टिकट रहने के बाद भी लिपिकीय चार्ज के नाम पर पैसे काट लिए जाते हैं।

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त्योहारो पर ट्रेनों में वेटिंग बढ़ने से यात्रियों के लिए सफर का संकट खड़ा हो जाता है। एक-एक सीट के लिए मारामारी होती है। कमोबेश दीपावली व उसके बाद छठ पर दिल्ली, मुंबई से लखनऊ आने वाले यात्रियों के लिए यही स्थिति है। खास बात यह है कि वेटिंग की सीटों की संख्या बढ़ते जाने से बुकिंग होती रहती है। इससे रेलवे को तो कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन यात्रियों की दुश्वारियां बढ़ जाती हैं। मुंबई रूट पर चलने वाली ट्रेनों में अधिकतम वेटिंग पहले जहां 250 से 300 तक पहुंचती थी, वहीं अब यह बढ़कर चार सौ तक पहुंच जाती है। ऐसे ही दिल्ली रूट की ट्रेनों की वेटिंग पहले डेढ़ सौ तक रहती थी और अब यह ढाई सौ का आंकड़ा पार कर जाती है।

दैनिक यात्री एसोसिएशन के अध्यक्ष एसएस उप्पल का कहना है कि ट्रेनों में कन्फर्म सीटों का पंद्रह से बीस प्रतिशत तक ही वेटिंग कोटा होना चाहिए। मसलन, रिजर्वेशन की 800 सीटें होने पर 150 तक ही वेटिंग की सीमा होनी चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। लंबी वेटिंग होने का नुकसान यात्रियों को होता है। कन्फर्म टिकट नहीं मिलने पर लिपिकीय चार्ज के रूप में 60 रुपये काट लिए जाते हैँ, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए।

13 सीटों के लिए 350 तक आवेदन आ जाते हैँ

मुंबई रूट की पुष्पक एक्सप्रेस में लंबी वेटिंग के चलते ही इमरजेंसी कोटा पर दबाव बढ़ जाता है। कई बार स्थिति यह होती है कि थर्ड एसी की 13 सीटों के लिए 350 तक आवेदन आ जाते हैं। दिल्ली रूट की वीआईपी ट्रेनों लखनऊ मेल, एसी एक्सप्रेस, शताब्दी में भी ऐसी ही हालत होती है। वेटिंग की सीमा तय हो तो ऐसा नहीं हो।

दिवाली की खुशियों पर भारी इंतजार के कांटे

ट्रेनों में लंबी वेटिंग ने दिवाली मनाने लखनऊ आने वाले लोगों की चुनौतियां बढ़ा दी है। विशेष ट्रेनों का किराया ज्यादा होने के बावजूद उनमें नियमित के मुकाबले ज्यादा वेटिंग है। मुंबई से लखनऊ आने वाली विशेष ट्रेनों में वेटिंग 143 पार पहुंच गई है। जबकि नियमित ट्रेनों में भी वेटिंग 120 चल रही है। दिल्ली से लखनऊ आने वाली ट्रेनों में भी वेटिंग है। अमूमन डबलडेकर एक्सप्रेस की चेयरकार में सीटें खाली रहती हैं, पर इसमें भी यात्रियों को सीटें नहीं मिल पा रही हैं।



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