गोवा की सनोफी कंपनी के कंसल्टेंट ने बरेली आकर हैप्पी मेडिकोज से बरामद एलेग्रा 120 एमजी टेबलेट को अपना मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने सहायक आयुक्त औषधि से कहा कि जिस बैच नंबर (पांच-एनजी 001) की यह टेबलेट है, उस बैच की दवा कंपनी ने बनाई ही नहीं है। ऐसे में सवाल यह है कि यह बाजार में कहां से आई? जाहिर है कि कोई अन्य कंपनी सनोफी के नाम से यह टेबलेट बाजार में खपा रही है।

सहायक आयुक्त औषधि संदीप कुमार ने बताया कि अभी कुछ दिनों पहले ही सनोफी कंपनी के कंसल्टेंट शहर आए थे। वह हैप्पी मेडिकोज से बरामद एलेग्रा टेबलेट का सैंपल भी ले गए हैं। उनके खुलासे के बाद हम फर्जीवाड़े की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। हैप्पी मेडिकोज के यहां से जो भी एलेग्रा टेबलेट बरामद हुई हैं, वह आगरा के बंसल मेडिकोज से मंगाई गई थीं। बरामद अन्य दवाओं के सर्वे सैंपल और लखनऊ स्थित प्रयोगशाला से गुणवत्ता की रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में बड़ी कार्रवाई की जाएगी।

थोक विक्रेताओं के यहां से बरामद हुईं संदिग्ध दवाएं 

सहायक आयुक्त ने बताया कि आगरा में जिन थोक कारोबारियों के विरुद्ध कार्रवाई हुई है वे टॉरेंट, सनफार्मा, सनोफी, ग्लेनमार्क जैसी नामचीन कंपनियों के नाम से नकली दवाएं बेच रहे थे। आगरा के कारोबारियों ने ही बरेली के थोक विक्रेताओं को इन संदिग्ध दवाओं की खेप भेजी है। बरेली के हैप्पी मेडिकोज, गुनीना फार्मास्युटिकल्स, हेल्थ फार्मास्युटिकल्स, जय बाबा की फार्मा, बरेली फार्मा से ऐसी संदिग्ध दवाओं का जखीरा बरामद हुआ है। इनके 33 सैंपल सर्वे के लिए कंपनियों को भेजे गए हैं।



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