लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में ऑब्स एंड गायनी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रूपिता कुलश्रेष्ठ के मुताबिक ड्युअल एवं क्वाड्रूपल टेस्ट के माध्यम से बच्चे के पैदा होने से पहले ही आनुवंशिक विसंगतियों का पता किया जा सकता है। संदेह की स्थिति में जेनेटिक टेस्टिंग भी की जा सकती है। वे रविवार को संस्थान के बायोकेमिस्ट्री विभाग की ओर से आयोजित गोष्ठी में बोल रहीं थीं।
कॉर्डन जीनोमिक्स के संस्थापक डॉ. अरविंद चौधरी ने बताया कि जेनेटिक जांचों के माध्यम से संक्रामक रोगों को पहचाना जा सकता है। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉ. राघवेंद्रन लिंघाइया ने कहा, आधुनिपक मशीनें जांच में बेहद सहायक साबित हो रही हैं। डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा, जांच की सुविधाएं अच्छी होने पर इलाज पर इसका सीधा असर पड़ता है। सरोजनी नायडू मेडिकल कॉलेज, आगरा में बायोकेमिस्ट्री विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कामना सिंह, लोहिया संस्थान में बायोकेमिस्ट्री विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष राज कुलश्रेष्ठ और सीनियर प्रोफेसर डॉ. वंदना तिवारी मौजूद रहीं।
