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उरई। जिला मुख्यालय के जिला अस्पताल, महिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज तो छोड़िए। ब्लॉक स्तरीय सीएचसी में भी आग से बुझाने के पुख्ता इंतजाम नहीं है। सब भगवान भरोसे चल रहा है। कहीं आग लगे तो बचाव के इंतजाम तक नहीं है। ज्यादातर निजी अस्पतालों में भी अग्नि सुरक्षा उपाय मानक के अनुसार नहीं लगे हुए हैं। अग्निशमन अधिकारी महेंद्र बाजपेई के अनुसार मानकों का पालन न करने पर सीएचसी कालपी को नोटिस दिया जा चुका है लेकिन इसके बाद भी उन्होंने कमियां पूरी नहीं की है। वह कई निजी अस्पतालों को भी नोटिस जारी कर चुके हैं।
सीएचसी कालपी में अग्नि सुरक्षा के मानक दुरुस्त नहीं
कालपी। सीएचसी में अग्नि सुरक्षा के मानक दुरुस्त नही है। समय सीमा खत्म कर चुके सिलिंडर और उलझे व खुले पडे बिजली के तार हादसों को दावत दे रहे हैं। यहां आग बुझाने के 17 सिलिंडर लगे है, उनमें दो की मियाद समाप्त हो गई है। विभाग ने आग बुझाने के लिए स्मोक अलार्म लगाए गए हैं, साथ ही पानी की पाइप लाइन भी बिछाई गई है लेकिन लाइन में पानी नहीं था। खुले और उलझे पड़े तार हादसों को दावत दे रहे हैं। शार्ट सर्किट होने पर हादसा हो सकता है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश वरदिया का कहना है कि अस्पताल के अग्निशमन यंत्र ठीक है। सिलिंडरों के साथ पानी की लाइनें भी ठीक है, जो छुटपुट कमियां है उन्हें जल्द ठीक करा दिया जाएगा।
पैथोलॉजी लैब में नहीं लगे अग्निशमन यंत्र
जालौन। सीएचसी मरीजों की दृष्टि से जनपद में पहला स्थान रखता है। प्रतिदिन ओपीडी में लगभग 500 से 700 मरीज तक अस्पताल में इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल में गर्भवती के प्रसव की सुविधा है। नवजात शिशुओं और उनकी मां को प्रथम तल पर बने वार्ड में रखा जाता है। अधिकारी यहां पुख्ता इंतजाम का दावा कर रहे हैं। फायर हाइड्रेंट सिस्टम को लगे हुए छह माह से अधिक समय बीत चुका है। लेकिन अभी तक इसे अस्पताल प्रबंधन के सुपुर्द नहीं किया गया है और न ही इसकी टेस्टिंग हुई है। कर्मचारियों को आपात स्थिति में इसका उपयोग करने का प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है। अस्पताल परिसर में ही ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट की स्थापना जुलाई माह में की गई। इसमें पैथोलॉजी लैब लगभग चार माह से संचालित हो रही है। अभी तक इस बिल्डिंग में आगजनी की घटना को रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। सीएचसी प्रभारी डॉ. केडी गुप्ता ने बताया कि सीएचसी में सेंट्रलाइज्ड फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगकर तैयार है। टंकी से पाइपलाइन का कनेक्शन भी हो चुका है। हालांकि कंपनी की ओर से अभी तक इस सिस्टम को अस्पताल के सुपुर्द नहीं किया गया है और न ही प्रशिक्षण दिया गया है।
सीएचसी का अग्निशमन प्लांट हैंडओवर नहीं
कोंच। सीएचसी में भी बड़ी लापरवाही सामने आई हैं। पूरे अस्पताल में डेढ़ साल पहले अग्निशमन की लाइन बिछा दी गई थी और टंकी, मोटर आदि तैयार हो चुकी है लेकिन अभी तक हैंडओवर न होने से चालू नहीं हो सकी है। सीएचसी में डेढ़ साल पहले लगाए गए अग्निशमन प्लांट अभी तक चालू ही नहीं हो सका। दीवारों में लाइनें बिछा दी गई हैं, छत पर पानी की टंकी व मोटर लगा दी गई है लेकिन प्लांट हैंडओवर न होने से चालू नहीं हो सका है। अभी तक इसकी प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है, जिससे कोई उसको आपातकालीन स्थिति में ऑपरेट भी कर सके। यह लापरवाही कभी भी लोगों के लिए मुसीबत बन सकती है। सीएचसी प्रभारी अनिल कुमार शाक्य का कहना है कि अग्निशमन प्लांट तैयार है लेकिन अभी तक हैंडओवर नहीं किया गया है।
21 सिलिंडरों में एक की मियाद पूरी
माधौगढ़। लीडिंग फायरमैन ब्रजकिशोर व फायरमैन संजय कुमार आर्या ने सीएचसी में लगे फायर एक्सटिंग्विशर सिलिंडरों का औचक निरीक्षण किया। बताया कि 21 सिलिंडरों में एक की मियाद पूरी हो चुकी थी और दो की मियाद जल्द पूरी हो जाएगी। हर वार्ड में दो सिलिंडर होने चाहिए। इसी तरह विद्यालयों, दुकानों, गेस्ट हाउस में सिलिंडरों का होना आवश्यक हैं। कहा कि जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी। (संवाद)
