अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह

Updated Fri, 16 Aug 2024 06:45 PM IST

यूपी के हाथरस जिले के रहने वाले अवधेश सिंह की शादी 1992 में उर्मिला देवी से हुई थी। 25 जून 2005 को उर्मिला देवी ने एक बेटी को जन्म दिया है। परिवार ने बेटी का नाम गौरी नंदिनी रखा वह। साल 2009 में अवधेश और उर्मिला के रिश्ते खराब हो गए। अवधेश ने उर्मिला को बेटी समेत घर से निकाल दिया। इसके बाद उर्मिला ने हाथरस कोर्ट में भरण पोषण के लिए केस दाखिल किया।


Important decision of the High Court: Daughter has the right to get maintenance from her father till marriage

इलाहाबाद हाईकोर्ट।
– फोटो : अमर उजाला।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि हिंदू पिता को बेटी का खर्च तब तक उठाना पड़ेगा, जब तक उसकी शादी नहीं हो जाती। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि बेटी के बालिग होने के आधार पर पिता उसके भरण पोषण का खर्च बंद नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा है कि देश के कानून से पहले धर्म शास्त्रों में दिए गए नियमों में एक हिंदू पुरुष को हमेशा अपने बच्चों का भरण पोषण करने के लिए नैतिक रूप से जिम्मेदार माना गया है। अदालत ने इसी आधार पर हाथरस के अवधेश सिंह की याचिका को खारिज कर दिया है।

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यूपी के हाथरस जिले के रहने वाले अवधेश सिंह की शादी 1992 में उर्मिला देवी से हुई थी। 25 जून 2005 को उर्मिला देवी ने एक बेटी को जन्म दिया है। परिवार ने बेटी का नाम गौरी नंदिनी रखा वह। साल 2009 में अवधेश और उर्मिला के रिश्ते खराब हो गए। अवधेश ने उर्मिला को बेटी समेत घर से निकाल दिया। इसके बाद उर्मिला ने हाथरस कोर्ट में भरण पोषण के लिए केस दाखिल किया। फैमिली कोर्ट के आदेश में कहा गया कि अवधेश सिंह को हर महीने पत्नी उर्मिला को भरण पोषण के लिए पच्चीस और बेटी गौरी नंदिनी को 20 हजार रुपये देने होंगे। 



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